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फास्ट ट्रैक पर मोदी सरकार 2.0, दो सत्र में लोकसभा से 14 और राज्यसभा से पास कराए 15 बिल

फास्ट ट्रैक पर मोदी सरकार 2.0, दो सत्र में लोकसभा से 14 और राज्यसभा से पास कराए 15 बिल

हाईलाइट

  • लोकसभा के शीतकालीन सत्र में 116 फीसदी कामकाज हुआ
  • संसद में अनुच्छेद 370, CAB और NRC जैसे अहम ​बिल पास किए गए

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र में मोदी सरकार फास्ट ट्रैक दोड़ रही है। लोकसभा के शीतकालीन सत्र में 116 फीसदी कामकाज (प्रोडक्टिविटी) हुआ है, जो पिछले मानसून सत्र की तुलना में सबसे अधिक रहा है। इस दौरान सदन की कार्यवाही ने कई सारे रिकॉर्ड तोड़े हैं। बीते मॉनसून सत्र की तरह शीत सत्र भी मोदी सरकार के लिए बेहद सफल रहा। इस दौरान लोकसभा में 14 और राज्यसभा में 15 बिल पास कराए। 

केंद्र सरकार ने दूसरे कार्यकाल के महज दो सत्र में सरकार ने दो अहम सियासी मोर्चे पर फतह हासिल की। पहले सत्र में अनुच्छेद 370 निरस्त कर सबको चौंकाया तो शुक्रवार को खत्म हुए शीतकालीन सत्र में नागरिकता संशोधन कानून को अमली जामा पहनाकर दूसरा हिंदूवादी एजेंडा पूरा करने में सफलता हासिल की। सरकार ने दोनों अहम एजेंडों को उच्च सदन में बहुमत से दूर रहने के बावजूद अपने दम पर अंजाम तक पहुंचाया। 

इसके अलावा संसद और विधानसभाओं में एससी-एसटी प्रतिनिधित्व आरक्षण को दस साल आगे बढ़ाने के साथ इनमें एंग्लो इंडियन कोटे को खत्म करने में भी सरकार कामयाब रही। फिर सरकार एसपीजी एक्ट में संशोधन कर एसपीजी की सुरक्षा पीएम तक ही सीमित रखने संबंधी कानून भी बनाने में कामयाब रही। लोकसभा का उत्पादकता 115 तो राज्यसभा की उत्पादकता 100 फीसदी रही।

ये प्रमुख बिल बने कानून
वर्तमान सत्र में सरकार ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों की सुरक्षा), जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक, सरोगेसी विनियमन, कॉरपोरेट कर कम करने संबंधी संशोधन, इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट प्रतिबंध, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और नागरिकता संशोधन जैसे अहम बिलों को कानून बनाने में सफल हुई।

लोकसभा के शीतकालीन सत्र में 116 फीसदी कामकाज
लोकसभा के शीतकालीन सत्र में 116 फीसदी कामकाज (प्रोडक्टिविटी) हुआ है, जो पिछले मानसून सत्र की तुलना में सबसे अधिक रहा है। इस दौरान सदन की कार्यवाही ने कई सारे रिकॉर्ड तोड़े हैं। राहुल गांधी द्वारा की गई टिप्पणी रेप इन इंडिया के बाद हालांकि सदन में शुक्रवार को सत्तापक्ष द्वारा हंगामा किए जाने के बाद इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित भी करना पड़ा। 18 नवंबर को शुरू हुए शीतकालीन सत्र के दौरान सदन की 20 बैठकें हुईं और इसकी कार्यवाही 130 घंटे 45 मिनट तक चली। इस दौरान सदन में कामकाज 116 फीसदी रहा, जो काफी बेहतर स्ट्राइक रेट कही जा सकती है। शीतकालीन सत्र के दौरान सार्वजनिक महत्व के कुल 364 मामले उठाए गए, जिनमें से 121 सदन में उठाए गए और 243 सदन पटल पर रखे गए।

शुक्रवार को सदन की कार्यवाही को स्थगित करते हुए बिरला ने कहा कि सदन ने कुछ प्रमुख विधेयकों को पारित किया है, जिनमें नागरिकता (संशोधन) विधेयक, एसपीजी (संशोधन) विधेयक, चिट फंड (संशोधन) विधेयक, और शस्त्र (संशोधन) विधेयक शामिल हैं।

फ्लोर मैनेजमेंट का कमाल
पहले सत्र की तरह दूसरे सत्र में भी विपक्ष को सरकार के फ्लोर मैनेजमेंट का कायल होना पड़ा। उच्च सदन में बहुमत न होने और विपक्ष के तीखे विरोध के बावजूद सरकार नागरिकता संशोधन बिल और एसपीजी एक्ट संशोधन बिल को बड़े अंतर से कानून बनाने में कामयाब रही। इनमें नागरिकता संशोधन बिल को पारित कराने के लिए सरकार न सिर्फ कई विरोधियों को साधने में कामयाब रही बल्कि विपक्ष के करीब-करीब सभी दलों में सेंध लगाया।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।