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गन्ने की कीमत 20 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ा सकती है मोदी सरकार

July 18th, 2018 20:47 IST
गन्ने की कीमत 20 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ा सकती है मोदी सरकार

हाईलाइट

  • धान की कीमत में 200 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा कर चुकी है मोदी सरकार।
  • प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को बैठक होने वाली है।
  • 255 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर कीमत 275 रुपए कर सकती है सरकार

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। धान के एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) में 200 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा करने वाली मोदी सरकार अब गन्ने की कीमत बढ़ाने का ऐलान भी कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को इस मुद्दे पर बैठक होने वाली है। बैठक में गन्ने का दाम 255 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 275 रुपए किया जा सकता है। बैठक में मोदी सरकार नए गन्ना सीजन के लिए कीमत की घोषणा करने वाली है।

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इस दाम पर ही खरीदती हैं चीनी मिल
गन्ने की कीमत हर साल खेती का सीजन शुरू होने से पहले घोषित की जाती है। इसे फेयर एंड रीम्यूनेरेटिव प्राइस कहते हैं। चीनी मिल इस कीमत पर ही किसानों से गन्ना खरीदती है। खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कैबिनेट को जो प्रस्ताव भेजा है, उसमें गन्ने की कीमत में 20 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का जिक्र है।

रिकवरी 10 प्रतिशत तो ही मिलेंगे 20 रुपए ज्यादा
प्रस्ताव के मुताबिक किसानों को नई कीमत का फायदा 10 प्रतिशत रिकवरी होने पर ही मिलेगा। रिकवरी का मतलब गन्ने से बनी चीनी की मात्रा होता है। 10 प्रतिशत रिकवरी तय होने से किसानों को 7-8 रुपए प्रति क्विंटल ही फायदा होने का अनुमान है। 2017  में रिकवरी 9.50 प्रतिशत रखी गई थी। रिकवरी जितनी कम होती है कीमत भी उतनी कम होती जाती है। रिकवरी बढ़ने पर कीमत बढ़ती है।

23000 करोड़ पहुंच गया था चीनी मिलों पर बकाया
चीनी मिलों पर बकाया कुछ समय पहले करीब 23000 करोड़ पहुंच गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के 150 गन्ना किसानों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं थीं, जिसमें सबसे बड़ी समस्या चीनी मिलों पर बकाया होना थी। राज्य सरकारें कई बार गन्ना किसानों को एफआरपी के अतिरिक्त बोनस बी देती हैं। कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों की सरकारें किसानों को बोनस देतीं आई हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।