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लोकसभा के मुकाबले विधानसभा चुनाव में एनडीए का वोट प्रतिशत घटा

October 25th, 2019 14:19 IST
लोकसभा के मुकाबले विधानसभा चुनाव में एनडीए का वोट प्रतिशत घटा

हाईलाइट

  • लोकसभा के मुकाबले विधानसभा चुनाव में एनडीए का वोट प्रतिशत घटा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के पांच महीने के भीतर ही हरियाणा और महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का वोट प्रतिशत कम हुआ है। इसी के साथ हरियाणा में भाजपा को पिछली बार की तुलना में सात, तो महाराष्ट्र में 17 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है।

2019 के लोकसभा चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव के बीच सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को हरियाणा में उठाना पड़ा। जहां, उसका वोट शेयर 22 प्रतिशत तक गिर गया, जबकि लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 58 प्रतिशत वोट शेयर के साथ राज्य की सभी 10 लोकसभा सीटों पर क्लीन स्वीप किया था।

अप्रैल-मई में लोकसभा का चुनाव हुआ था। भाजपा को इस बार हरियाणा विधानसभा चुनाव में 36.49 प्रतिशत वोट शेयर मिला है। हालांकि, 2014 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े से यह तीन प्रतिशत अधिक है।

लिहाजा भाजपा इसे अपनी सफलता मान रही है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परिणाम आने के बाद गुरुवार को पार्टी मुख्यालय पर पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में बढ़े तीन प्रतिशत वोट शेयर को सफलता करार दिया।

इसी तरह महाराष्ट्र की बात करें, तो वहां भी 2019 के लोकसभा चुनाव की तुलना में भाजपा और उसके गठबंधन का वोट प्रतिशत कम हुआ है। 2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को 50.8 प्रतिशत वोट मिले थे, मगर पांच महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में यह आंकड़ा घटकर 42.1 प्रतिशत पर अटक गया।

विधानसभा 2014 की तुलना में 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के करीब छह लाख वोट घट गए। पिछली बार भाजपा को एक करोड़ 47 लाख वोट मिले थे, इस बार एक करोड़ 41 लाख वोट मिले हैं। पिछली बार महाराष्ट्र में भाजपा को 122 सीटें मिलीं थीं, इस बार 105 सीटें मिली हैं।

हालांकि, पिछली बार भाजपा ने अलग चुनाव लड़ा था, इस बार शिवसेना से गठबंधन के कारण पार्टी सिर्फ 164 सीटों पर मैदान में उतरी।

भाजपा का कहना है कि कम सीटों पर लड़ने के हिसाब से पार्टी का स्ट्राइक रेट अच्छा है। इस विधानसभा चुनाव में शिवसेना ने 16.41 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।