दैनिक भास्कर हिंदी: अमित शाह बोले- देश में हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी को मिलेगी शरण, मुस्लिम का जिक्र भी नहीं

November 21st, 2019

हाईलाइट

  • एनआरसी की प्रक्रिया पूरे देश में जब लागू होगी - गृहमंत्री अमित शाह
  • जिनका नाम एनआरसी सूची में नहीं है वे ट्रिब्युनल के पास जा सकते हैं- अमित शाह
  • एनआरसी सूची में नहीं है वे ट्रिब्युनल के पास जा सकते हैं - शाह

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। आज(बुधवार) सत्र का तीसरा दिन है। राज्यसभा में एनआरसी और कश्मीर मुद्दे पर गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी बात रखी। एनआरसी मुद्दे पर शाह ने कहा कि धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा रहा है। एनआरसी की प्रक्रिया पूरे देश में जब लागू होगी, तब असम में भी एनआरसी प्रकिया शुरू होगी। उन्होंने कहा, जिनका नाम एनआरसी सूची में नहीं है वे ट्रिब्युनल के पास जा सकते हैं। ट्रिब्युनल तहसील स्तर पर बनाए जाएंगे। 

अमित शाह ने कहा कि एनआरसी की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई है। किसी भी धर्म के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, सरकार मानती है हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी जो शरणार्थी हैं, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हैं। उन्हें नागरिकता मिलनी चाहिए। इस दौरान शाह ने मुस्लिम शरणार्थियों का नाम नहीं लिया। बता दें गृहमंत्रालय ने अगस्त के आखिरी हफ्ते में असम में एनआरसी की फाइनल लिस्ट जारी की थी। इस लिस्ट में 19 लाख 6 हजार 657 लोगों के नाम शामिल नहीं है। जिस व्यक्ति का नाम फाइनल लिस्ट में नहीं हैं वो ट्रिब्युनल में अपनी नागरिकता साबित कर सकते है। 

गृहमंत्री शाह ने जम्मू-कश्मीर की हालात पर कहा कि यहां हालात सामान्य है। 5 अगस्त के बाद जम्मू-कश्मीर में एक भी व्यक्ति की पुलिस फायरिंग में मौत नहीं हुई है। धारा 144 के तहत लगाए सारे प्रतिबंध 195 थानों से हटा दिए गए हैं। उन्होंने इंटरनेट सेवाओं को लागू करने के सवाल पर कहा कि उचित समय पर वहां के प्रशासन की अनुशंसा के आधार पर निर्णय किया जा सकता है। जब देश की सुरक्षा, वहां के नागरिकों की सुरक्षा और आतंकवाद से लड़ाई का सवाल है। कहीं न कहीं प्रायॉरिटी तय करनी पड़ती है। 

अमित शाह कहा कि जम्मू-कश्मीर में पेट्रोल, डीजल, केरोसिन, रसोई गैल और चावल की उपलब्धता पर्याप्त है। 22 लाख मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होने की उम्मीदन है। सभी लैंडलाइन भी खुले हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में दवाइयों की उपलब्धता पर्याप्त है। दवाइयों की मोबाइल वैन और अस्पतालों में दवाइयों की दुकानों में पर्याप्त संख्या में दवाइयां उपलब्ध हैं।