दैनिक भास्कर हिंदी: नेहरू, इंदिरा के राज में सिर्फ कांग्रेस नेताओं, चमचों की गरीबी दूर हुई : गडकरी

June 14th, 2020

हाईलाइट

  • नेहरू, इंदिरा के राज में सिर्फ कांग्रेस नेताओं, चमचों की गरीबी दूर हुई : गडकरी

नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने देश की जनता की बदहाली के लिए कांग्रेस की पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने गरीबी हटाने की बात की, मगर जनता की गरीबी नहीं गई, बल्कि पार्टी नेताओं और चमचों की गरीबी दूर हुई।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को गुजरात की वर्चुअल रैली में कहा, कांग्रेस ने 70 साल से गरीबी हटाओ का नारा दिया, लेकिन देश के गरीब, किसान, मजदूर की गरीबी नहीं दूर हुई, बल्कि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं और चमचों की गरीबी जरूर दूर हुई।

गडकरी ने कहा कि 1947 से लेकर 2020 के बीच कांग्रेस को 55 से 60 साल देश चलाने का मौका मिला। केंद्र से राज्यों और निगमों तक में कांग्रेस की सरकारें रहीं। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने देश के विकास के लिए रूस का सोशलिस्ट-कम्युनिस्ट मॉडल चुना। नेहरू जी चले गए और फिर इंदिरा गांधी आईं। उन्होंने गरीबी हटाओ का नारा दिया लेकिन गरीबी नहीं हटी। मुहर लगाते-लगाते पीढ़ियां गुजर गईं मगर बदलाव की कोई तस्वीर सामने नहीं आई। काम करने वाले गरीब की गरीबी दूर नहीं हुई। लेकिन कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं, नेताओं और चमचों की गरीबी जरूर दूर हुई।

गडकरी ने कहा, मोदी सरकार ने पिछले 5 साल में जो कार्य किया है, उसकी अगर कांग्रेस के 55 साल से तुलना की जाए तो मैं दावे के साथ कह सकता हू कि जो काम 5 साल में हुआ, वह कांग्रेस के 55 साल के शासनकाल में नहीं हो पाया।

नितिन गडकरी ने अपने मंत्रालय की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा, मैं 60 हजार करोड़ से रोड का निर्माण कर रहा हूं। लेह और लद्दाख को आठ हजार करोड़ रुपये की सड़क से जोड़ा जा रहा है। लगातार मोदी सरकार विकास के कार्य कर रही है।

गडकरी ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि वह कभी आमने-सामने की लड़ाई नहीं जीत सकता, इसलिए वह आतंकियों के सहारे छद्म युद्ध लड़ता है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर आतंकियों से सहानुभूति रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब मैं भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष था तो एक शहीद के पिता ने मुझसे पूछा था कि कांग्रेस के नेता आतंकियों के मारे जाने पर उनके घर तो श्रद्धांजलि देने के लिए जाते हैं, मगर शहीद हुए मेरे बेटे के घर क्यों नहीं आए। गडकरी ने कहा कि तब उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था।