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J&K : अफसरों के सुर बदले, अब जम्मू-कश्मीर में होंगे ये बड़े बदलाव

June 20th, 2018 21:45 IST
J&K : अफसरों के सुर बदले, अब जम्मू-कश्मीर में होंगे ये बड़े बदलाव

डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में बीजेपी ने महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस लेते हुए पीडीपी के साथ तीन साल तक चले गठबंधन को तोड़ दिया है। मुफ्ती सरकार गिरने के साथ ही बुधवार सुबह राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आदेश जारी कर तत्काल प्रभाव से जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू कर दिया है। राज्य में राज्यपाल शासन लागू होते ही यहां के सेना और पुलिस समेत प्रशासनिक अधिकारियों के भी सुर बदल गए हैं। आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन पहले की तरह जारी रहेगा। वहीं डीजीपी एसपी वैद ने कहा कि आने वाले दिनों में आतंकियों के खिलाफ होने वाले ऑपरेशन में तेजी आएगी।

डीजीपी एसपी वैद ने बुधवार सुबह मीडिया से बात की। इस दौरान उनसे राज्यपाल शासन लागू होने और उससे पुलिस प्रशासन के काम पर कितना प्रभाव पड़ेगा जैसे सवाल पुछे गए। इन सवालों का जवाब देते हुए एसपी वैद ने कहा कि, 'मुझे लगता है कि इससे काम करना और आसान हो जाएगा। हमारे ऑपरेशन जारी रहेंगे। रमजान के दौरान ऑपरेशंस पर रोक लगाई गई थी। ऑपरेशन पहले भी चल रहे थे, अब इन्हें और तेज किया जाएगा।'

दिल्ली में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात करते हुए इसी मामले में सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा कि राज्यपाल शासन लगने से कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल शासन से सेना के काम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और आतंक के खिलाफ ऑपरेशन पहले की तरह जारी रहेगा। सेना प्रमुख ने कहा, 'सिर्फ रमजान के दौरान ही हमने अपना ये ऑपरेशन बंद किया था। अब फिर से आतंकियों के खिलाफ हमारे ये ऑपरेशन पहले की तरह ही चलते रहेंगे। गवर्नर रूल लागू होने से हमारे काम पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हम पर कोई भी राजनीतिक दबाव नहीं होता है। बिपिन रावत ने सेना के ऑपरेशन में तेजी लाने की बात भी कही है।

छत्तीसगढ़ के ACS को ट्रांसफर कर कश्मीर भेजा
जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के साथ ही प्रशासन व्यवस्था में भी हलचल शुरू हो गई है। बुधवार को छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS गृह) बीवीआर सुब्रमण्यम को ट्रांसफर करते हुए जम्मू-कश्मीर भेजा गया है। मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने मंगलवार शाम को सुब्रमण्यम के तबादले को मंजूरी दे दी।

बता दें कि बीवीआर सुब्रमण्यम 1987 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह 2002 से 2007 तक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निजी सचिव भी रह चुके हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वे किस पद पर जम्मू-कश्मीर में कार्य करेंगे। वह राज्यपाल एन.एन. वोहरा के सलाहकार के रूप में या फिर राज्य के मुख्य सचिव के रूप में भी काम कर सकते हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।