दैनिक भास्कर हिंदी: 35,000 से ज्यादा किसान 180 km चलकर पहुंचे मुंबई, घेरेंगे विधानसभा

March 12th, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र सरकार कृषि संकट से निपटने में विफल दिख रही है। इसके विरोध में लगभग 35 हजार किसानों का मोर्चा राजधानी पहुंच चुका है। जो घाटकोपर से आगे बढ़ता हुआ सोमैया मैदान पहुंच रहा है। इससे पहले शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने अखिल भारतीय किसान सभा के किसानों से मुलाकात की। साथ ही पार्टी की तरफ से उनका समर्थन किया। वहीं सरकार की तरफ से कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन ने किसान नेताओं से मिलकर सरकार से बात करने की बात कही है।

सोमवार को किसान नेताओं और सीएम देवेंद्र फडणवीस से बीच मुलाकात होने की संभावना है। इसके अलावा विपक्ष इस मुद्दे को संसद में पुरजोर तरीके से उठाएगा।12 मार्च को किसानों ने महाराष्ट्र की विधानसभा के घेराव का ऐलान किया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के किसान मोर्चे अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) की अगुवाई में यह विरोध मार्च मंगलवार को नासिक से मुंबई के लिए रवाना हुआ था। 

किसानों ने नासिक से मुंबई तक मोर्चा खोला मोर्चा
अन्य मांगों के बीच पूरी ऋण माफी की मांग करने के लिए 30,000 से ज्यादा किसानों ने नासिक से मुंबई तक मोर्चा खोला है। ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) के करीब 25 हजार से ज्यादा किसान 5 मार्च से पूर्ण कर्ज माफी के लिए मार्च कर रहे हैं और शनिवार को किसानों का ये जत्था भिवंडी में पहुंच गया, जो राजधानी मुंबई से कुछ ही किलोमीटर दूर है। AIKS के ये किसान 12 मार्च को विधानसभा का घेराव करेंगे। बता दें कि किसानों का ये मार्च नासिक से शुरू हुआ था, जो मुंबई तक जाएगा।

क्या है इन किसानों की मांग?
1. किसानों का कर्ज पूरी तरह से माफ किया जाए।
2. किसानों का बिजली बिल भी माफ किया जाए।
3. स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों को लागू किया जाए।
4. जंगल अधिकार कानून को भी लागू किया जाए।

180 किलोमीटर का है ये मार्च
जानकारी के मुताबिक, ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) ने 5 मार्च को सेंट्रल नासिक के CBS चौक से चलना शुरू किया था। हर दिन 30 किलोमीटर चलते हुए ये मार्च 12 मार्च को मुंबई पहुंचेगा और विधानसभा का घेराव करेगा। नासिक से मुंबई के बीच AIKS का ये मार्च 180 किलोमीटर का है। महाराष्ट्र में AIKS को किसानों का समर्थन काफी मिल रहा है। बताया जा रहा है कि इस मार्च में शामिल होने के लिए ठाणे और पालघर के किसान भी आए हैं।

कैसे भड़का किसानों का गुस्सा?
मई 2017 में महाराष्ट्र की फडनवीस सरकार के खिलाफ किसानों ने कर्ज माफी की मांग को लेकर एक बड़ा आंदोलन किया था। जिसके बाद राज्य सरकार ने किसानों की मांग को मानते हुए 5 एकड़ से कम जमीन वाले किसानों का पुराना कर्ज माफ करने का फैसला लिया था। साथ ही नया बैंक लोन देने का भी फैसला लिया था, तब जाकर किसान आंदोलन शांत हुआ। किसानों के मुताबिक सरकार ने 34,000 करोड़ रुपए की कर्जमाफी का ऐलान किया था, लेकिन पिछले 6 महीनों में केवल 13,700 करोड़ का ही कर्ज माफ किया गया है। इसी कारण एक बार फिर से कर्जमाफी को लेकर किसानों ने आंदोलन ने छेड़ दिया।

बुलेट ट्रेन जैसे प्रोजेक्ट के लिए जमीन नहीं
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक AIKS के सेक्रेटरी राजू देसले ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि 'हम लोग राज्य सरकार से चाहते हैं कि वो सुपर हाईवे और बुलेट ट्रेन जैसे प्रोजेक्ट के नाम पर खेती की जमीनें लेना बंद करे।' उन्होंने कहा कि 'पिछले साल फडनवीस सरकार ने किसानों का 34 हजार करोड़ रुपए का कर्ज सशर्त माफ करने की घोषणा के बाद जून से लेकर अब तक महाराष्ट्र में 1753 किसान आत्महत्या कर चुके हैं।' उन्होंने बताया कि उनके इस मार्च में 25 हजार किसान शामिल हुए हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर 'किसान-विरोधी नीति' अपनाने का भी आरोप लगाया।