दैनिक भास्कर हिंदी: ट्रेन-18 कहलाएगी ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’, शताब्दी एक्सप्रेस से 40 फीसदी ज्यादा होगा किराया

January 27th, 2019

हाईलाइट

  • सेमी-हाईस्पीड ट्रेन-18 जल्द ही नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चलेगी।
  • केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ट्रेन-18 को अब 'वंदे भारत एक्सप्रेस' के नाम से जाना जाएगा।
  • इस ट्रेन का किराया शताब्दी एक्सप्रेस से करीब 40-50 फीसदी अधिक होगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूरी तरह से देश में निर्मित आधुनिक तकनीक वाली सेमी-हाईस्पीड ट्रेन-18 जल्द ही नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चलेगी। केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को कहा कि ट्रेन-18 को अब 'वंदे भारत एक्सप्रेस' के नाम से जाना जाएगा। यह ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी। इसके साथ ही यह नई दिल्ली और वाराणसी के बीच 755 किलोमीटर की दूरी को मात्र 8 घंटे में तय करेगी। इस ट्रेन का किराया शताब्दी एक्सप्रेस से करीब 40-50 फीसदी अधिक होगा। इस ट्रेन में 16 कोच हैं, जो कि वातानुकूलित हैं। 

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, 'यह ट्रेन पूरी तरह से भारत में बनी है। आम जनता ने विभिन्न नामों का सुझाव दिया था, लेकिन हमने इसे 'वंदे भारत एक्सप्रेस' नाम देने का फैसला किया है। लोगों को गणतंत्र दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार ने यह उपहार दिया है। हम प्रधानमंत्री से अनुरोध करेंगे कि वह इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएं।' PMO के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री बजट पेश होने के बाद इस ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं।

बता दें कि ट्रेन-18 भारत की सबसे तेज रफ्तार ट्रेन है। इस ट्रेन को चेन्नई के इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में बनाया गया है। खास बात यह है कि इस ट्रेन को पूरी तरह से भारतीय इंजीनियर्स ने डिजाइन किया है और इसका बौद्धिक संपदा अधिकार यानी आईपीआर भारतीय रेलवे के पास है। ट्रेन-18 को 97 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। दूसरे देशों में इस तरह की ट्रेन को बनाने में 160 करोड़ से लेकर 200  करोड़ के बीच का खर्च आता हैं।

इस ट्रेन के अंदर 16 कोच हैं, वाई-फाई, जीपीएस बेस्ड यात्री सूचना प्रणाली, स्पर्श मुक्त जैव शौचालय, एलईडी लाइट, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट और उपस्थित यात्रियों तथा मौसम के अनुसार तापमान को कम ज्यादा करने में सक्षम मौसम नियंत्रण प्रणाली जैसी सुविधाएं उपलब्ध है। ट्रेन के अंदर एडवांस्ड सस्पेंशन सिस्टम लगाया गया है जिसकी वजह से ट्रेन के अंदर बैठे यात्रियों को मामूली झटका भी नहीं लगेगा।