दैनिक भास्कर हिंदी: मन की बात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से पूछा सवाल, सही जवाब देने पर मिलेगा ईनाम

June 27th, 2021

हाईलाइट

  • मन की बात कार्यक्रम का आज होगा प्रसारण
  • रेडियो के माध्यम से पीएम मोदी देंगे संबोधन
  • हर महीने के अंतिम रविवार को प्रसारित होता है कार्यक्रम

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (रविवार) सुबह 11 बजे मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के माध्यम से देशवासियों को संबोधित किया। पीएम मोदी के कार्यक्रम का यह 78वां संस्करण था। कार्यक्रम की शुरुआत में पीएम मोदी ने लोगों से एक सवाल भी पूछा।

पीएम मोदी ने कहा, ओलंपिक के कौन से खेल में भारत ने अब तक सबसे ज्यादा मेडल जीते हैं? ओलंपिक में किस खिलाड़ी ने सबसे ज्यादा पदक जीते हैं? अक्सर  मन की बात में, आपके प्रश्नों की बौछार रहती है। इस बार मैंने सोचा कि कुछ अलग किया जाए, मैं आपसे प्रश्न करूं। "तो, ध्यान से सुनिए मेरे सवाल- ओलंपिक में Individual Gold जीतने वाला पहला भारतीय कौन था? साथियो, आप मुझे जवाब भेजें न भेजें, पर MyGov में Olympics पर जो quiz है, उसमें प्रश्नों के उत्तर देंगे तो कई सारे इनाम जीतेंगे। ऐसे बहुत सारे प्रश्न MyGov के ‘Road to Tokyo Quiz’ में हैं। आप ‘Road to Tokyo Quiz’ में भाग लें।

पीएम मोदी ने कहा, उनके माता-पिता मजदूरी कर परिवार चलाते हैं, और अब उनका बेटा, अपना पहला, Olympics खेलने Tokyo जा रहा है। ये सिर्फ उनके माता-पिता ही नहीं, हम सभी के लिए कितने गौरव की बात है। हमारे प्रवीण जाधव जी के बारे में आप सुनेंगे, तो, आपको भी लगेगा कि कितने कठिन संघर्षों से गुजरते हुए प्रवीण जी यहां पहुंचे हैं। प्रवीण जाधव जी, महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक गांव के रहने वाले हैं। वो Archery के बेहतरीन खिलाड़ी हैं।

पीएम मोदी ने कहा, जब Talent, Dedication, Determination और Sportsman Spirit एक साथ मिलते हैं, तब जाकर कोई champion बनता है। Tokyo जा रहे हमारे Olympic दल में भी कई ऐसे खिलाड़ी शामिल हैं, जिनका जीवन बहुत प्रेरित करता है। टोक्यो जा रहे हर खिलाड़ी का अपना संघर्ष रहा है, बरसों की मेहनत रही है। वो सिर्फ अपने लिए ही नहीं जा रहें बल्कि देश के लिए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर आप #Cheer4India के साथ अपने इन खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दे सकते हैं।

पीएम मोदी ने कहा, कभी-ना-कभी, ये विश्व के लिए case study का विषय बनेगा कि भारत के गांव के लोगों ने, हमारे वनवासी-आदिवासी भाई-बहनों ने, इस कोरोना काल में, किस तरह, अपने सामर्थ्य और सूझबूझ का परिचय दिया। हमारे देश में अब मानसून का सीजन भी आ गया है। बादल जब बरसते हैं तो केवल हमारे लिए ही नहीं बरसते, बल्कि बादल आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बरसते हैं। इसलिए मैं जल संरक्षण को देश सेवा का ही एक रूप मानता हूं।

पीएम मोदी ने कहा, हमारे शास्त्रों में कहा गया है- “नास्ति मूलम् अनौषधम्” अर्थात, पृथ्वी पर ऐसी कोई वनस्पति ही नहीं है जिसमें कोई न कोई औषधीय गुण न हो! हमारे आस-पास ऐसे कितने ही पेड़ पौधे होते हैं जिनमें अद्भुत गुण होते हैं, लेकिन कई बार हमें उनके बारे में पता ही नहीं होता! मध्य प्रदेश के सतना के एक साथी हैं श्रीमान रामलोटन कुशवाहा जी, उन्होंने बहुत ही सराहनीय काम किया है। रामलोटन जी ने अपने खेत में एक देशी म्यूजियम बनाया है। इस म्यूजिम में उन्होंने सैकड़ों औषधीय पौधों और बीजों का संग्रह किया है।

पीएम मोदी ने कहा, अब से कुछ दिनों बाद 1 जुलाई को हम National Doctors’ Day मनाएंगे। ये दिन देश के महान चिकित्सक और Statesman, डॉक्टर बीसी राय की जन्म-जयंती को समर्पित है। कोरोना-काल में doctors के योगदान के हम सब आभारी हैं। हमारे देश में कई लोग ऐसे भी हैं जो डॉक्टर्स की मदद के लिए आगे बढ़कर काम करते हैं। श्रीनगर से एक ऐसे ही प्रयास के बारे में मुझे पता चला। यहां डल झील में एक बोट एंबुलेंस सर्विस की शुरूआत की गई।

पीएम मोदी ने कहा, एक जुलाई को Chartered Accountants Day भी मनाया जाता है। अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए Chartered Accountants बहुत अच्छी और सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। मैं सभी Chartered Accountants, उनके परिवार के सदस्यों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

पीएम मोदी ने कहा, कोरोना के खिलाफ हम देशवासियों की लड़ाई जारी है, 21 जून को वैक्सीन अभियान के अगले चरण की शुरुआत हुई और उसी दिन देश ने 86 लाख से ज़्यादा लोगों को मुफ्त वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड भी बना दिया..वो भी एक दिन में। एक साल पहले सबके समाने सवाल था कि वैक्सीन कब आएगी? आज हम एक दिन में लाखों लोगों को मेड इन इंडिया वैक्सीन मुफ्त में लगा रहे हैं। यही तो नए भारत की नई ताकत है।

पीएम मोदी ने कहा, कभी-ना-कभी ये विश्व के लिए केस स्टडी का विषय बनेगा कि भारत के गांव के लोगों, हमारे वनवासी-आदिवासी भाई-बहनों ने इस कोरोना काल में किस तरह अपने सामर्थ्य और सूझबूझ का परिचय दिया। गांव के लोगों ने क्वारंटीन सेंटर बनाए, स्थानीय जरूरतों को देखते हुए कोविड प्रोटोकॉल बनाए।