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राज्यसभा में राजा और महाराजा होंगे आमने-सामने

June 19th, 2020 23:00 IST
 राज्यसभा में राजा और महाराजा होंगे आमने-सामने

हाईलाइट

  • राज्यसभा में राजा और महाराजा होंगे आमने-सामने

भोपाल 19 जून (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश की सियासत के दो दिग्गज, जो कभी कांग्रेस में साथ रहते हुए भी अलग-अलग थे, अब दोनों अलग-अलग दलों से राज्यसभा में एक-दूसरे के आमने-सामने नजर आएंगे। महाराजा यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा की बेंच पर होंगे तो उनके सामने कांग्रेस की बेंच पर राजा यानी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह नजर आएंगे।

मध्यप्रदेश से राज्यसभा की 3 सीटों के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। दो स्थानों पर भाजपा ने जीत दर्ज की है तो वहीं एक सीट कांग्रेस के खाते में आई है।

सिंधिया घराने से होने के नाते पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को महाराजा कहा जाता है, वहीं राघोगढ़ रियासत के प्रतिनिधि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को राजा कहकर बुलाया जाता है।

कांग्रेस से सिंधिया की बगावत ने राज्य के सियासी समीकरणों को ही बदल दिया। सिंधिया के साथ कांग्रेस के 22 विधायकों ने पार्टी छोड़ने के साथ विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसके चलते तीन महीने पहले कांग्रेस की कमल नाथ सरकार गिरी और भाजपा सत्ता में आई। इतना ही नहीं, राज्यसभा की संभावित दो सीटों में से कांग्रेस के खाते में एक ही सीट आई।

मध्यप्रदेश की सियासत में सिंधिया राजघराने और दिग्विजय सिंह के परिवार की अदावत काफी पुरानी है। दोनों ही राजघरानों के प्रतिनिधि भले ही कांग्रेस में एक साथ रहे, मगर उनके बीच पटरी कभी नहीं बैठी और उसी का नतीजा रहा कि दोनों के बीच गाहे-बगाहे टकराव के हालात बनते रहे।

सिंधिया ने इस जीत के बाद भाजपा के नेतृत्व के प्रति आभार जताया है वहीं राज्य के विकास में हरसंभव सहयोग का वादा भी किया है।

वहीं, कमल नाथ राजाओं-महाराजाओं पर तंज कसने में कभी पीछे नहीं रहते और उन्होंने बीते दिनों कहा भी था कि जो राजा-महाराजा कांग्रेस को धोखा देकर गए हैं, उनका हश्र क्या हुआ, सबके सामने है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया यानी महाराजा और दिग्विजय सिंह यानी राजा अब निर्वाचित होकर राज्यसभा में पहुंचे हैं। यह पहला मौका होगा, जब दोनों ही नेता संसद के उच्च सदन में एक-दूसरे के आमने-सामने होंगे।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।