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आगरा का सूर सरोवर अब बना रामसर साइट

November 15th, 2020 13:30 IST
 आगरा का सूर सरोवर अब बना रामसर साइट

हाईलाइट

  • आगरा का सूर सरोवर अब बना रामसर साइट

आगरा, 15 नवंबर (आईएएनएस)। आगरा-दिल्ली राजमार्ग पर स्थित मशहूर सूर सरोवर झील जिसे कीथम भी कहते हैं, उसे अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आद्रभूमि (वेटलैंड) की सूची रामसर साइट में जोड़ा गया है।

उत्तर प्रदेश की यह आठवीं सबसे आद्रभूमि है। इस वेटलैंड साइट को यूनेस्को ने 1971 में स्थापित अंतर-सरकारी पर्यावरण संधि के जरिए रामसर कन्वेंशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय महत्व के लिए नामित किया गया है। यह पूरी झील 7.13 वर्ग किमी के जलग्रहण क्षेत्र में बनाई गई है। इसे 1991 में राज्य वन विभाग ने राष्ट्रीय पक्षी अभयारण्य भी घोषित किया था।

प्रवासी पक्षियों को आश्रय और प्रजनन वाली यह कृत्रिम झील 106 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों का घर है। यह साइट उन पक्षियों की प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण है जो मध्य एशियाई फ्लाईवे पर प्रवास करते हैं, जिसमें 30,000 से अधिक जल पक्षी हर साल यहां आते हैं। अभयारण्य में लगभग 300 अजगर और 60 से ज्यादा प्रजातियों की मछलियां हैं।

आगरा में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य परियोजना के उप संरक्षक दिवाकर श्रीवास्तव ने कहा कि इस बात की खुशी है कि इस साइट को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।

योगी आदित्यनाथ सरकार इस पक्षी विहार को इको टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने की योजना भी बना रही है। इसे लेकर उत्तर प्रदेश के वन और पर्यावरण मंत्री दारा सिंह चौहान ने फरवरी में घोषणा भी की थी।

इससे पहले राज्य के 6 अन्य वेटलैंड्स को साल की शुरूआत में रामसर साइट घोषित किया गया था। वहीं आगरा शहर में अब पर्यटकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त स्पॉट की संख्या 4 हो गई है। इसमें 3 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और एक वेटलैंड है।

एसडीजे-एसकेपी

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।