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किसान आंदोलन पर इंटरनेशनल मीडियाः न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा, 'लाल परेड से केंद्र सरकार को सीधी चुनौती' 

किसान आंदोलन पर इंटरनेशनल मीडियाः न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा, 'लाल परेड से केंद्र सरकार को सीधी चुनौती' 

हाईलाइट

  • दिल्ली में हिंसा के दौरान एक प्रदर्शनकारी की मौत
  • रैली को अराजकता में बदल दिया, जो केंद्र सरकार को "सीधी चुनौती" देने निकले थे।
  • ट्रैक्टर रैलीः बड़ी संख्या में किसान लाल किले पर पहुंचे।

डिजिटल डेस्क ( भोपाल)। देश में पहली बार गणतंत्र दिवस पर किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली, जो कुछ हुड़दंगियों की वजह से हिंसा में बदल गई। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने दिल्ली के किसानों की हिंसा पर लिखा कि दिल्ली में हिंसा के दौरान एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई, जबकि दिल्ली और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच झड़पों में दिल्ली पुलिस के 80 जवान घायल हो गए। 

किसानों ने मंगलवार को अपने निर्धारित समय से बहुत पहले ट्रैक्टर परेड शुरू कर दिया था, और पुलिस के साथ हुए समझौते को दरकिनार करते हुए राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश किया और करनाल बाईपास, मुकरबा चौक, ट्रांसपोर्ट नगर, अक्षरधाम, गाजीपुर और टिकरी सीमा पर कई मोचरें का प्रतिनिधित्व किया। वहीं तलवारों से लैस कुछ किसान पुलिस के साथ भी भिड़ते दिखे।

जैसे ही किसान आईटीओ चौराहे पर पहुंचे और लाल किले की ओर बढ़ने की कोशिश की, कई किसान पुलिस कर्मियों से भिड़ गए और उन पर लाठी और लोहे की रॉड से हमला किया। किसानों ने अपने ट्रैक्टरों के साथ कई वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। 

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा... 

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि, नई दिल्ली में किसानों पर पुलिस को आंसू गैस के गोल छोड़ने पड़े और किसान रैली को अराजकता में बदल दिया, जो केंद्र सरकार को "सीधी चुनौती" देने निकले थे। वेबसाइड ने आगे लिखा कि, 'यह स्पष्ट नहीं है कि सुरक्षा बल या खेतिहर नेता में से किसने नियंत्रण खोया। प्रदर्शनकारियों को शहर के बाहर धकेल सकते थे। पिछले दो महीनों से राजधानी की सीमाओं पर किसान आंदोलन कर रहे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परेड की सलामी ले रहे थे और दूसरी तरफ कुछ ही दूरी पर यह आंदलोन चल रहा था। 

एक समाचार रिपोर्ट में, बीबीसी ने इस घटना की रिपोर्ट करते हुए कहा कि कई जगह किसान सहमत हुए मार्गों पर ट्रैक्टर परडे निकालते हुए दिखाई दिए। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का एक वर्ग पुलिस बैरिकेड तोड़कर राजधानी में प्रवेश कर गया। बीबीसी ने हैडिंग दी कि ट्रैक्टर रैलीः बड़ी संख्या में किसान लाल किले पर पहुंचे। 

दी गार्जियन ने लिखा कि ने मंगलवार को  देश के गणतंत्र दिवस समारोह से ज्यादा "अराजक और हिंसक" दृश्यों की चर्चा रही। 


दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर किसानों के विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रिटिश लेबर पार्टी के सांसद तनमनजीत सिंह धेसी ने कहा है कि कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के दृश्यों को देखकर बहुत दुख हुआ। उन्होंने ट्वीट में कहा, उल्लेखनीय है कि मंगलवार को बड़ा ट्रैक्टर परेड और चल रहे महीनों लंबा संघर्ष (वर्तमान में दुनिया में सबसे बड़ा विरोध) शांतिपूर्ण और अस्तित्व के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित करने वाला रहा। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।