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25 अक्टूबर को पार्टी लीडर्स के साथ सोनिया की मीटिंग, चुनावी नतीजों पर चर्चा की संभावना

25 अक्टूबर को पार्टी लीडर्स के साथ सोनिया की मीटिंग, चुनावी नतीजों पर चर्चा की संभावना

हाईलाइट

  • कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगी
  • महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के एक दिन बाद ये मीटिंग होगी
  • इस मीटिंग में चुनाव के नतीजों पर चर्चा होने की संभावना है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के एक दिन बाद कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगी। बैठक नई दिल्ली में सोनिया गांधी के आवास पर होगी। सूत्रों ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, अहमद पटेल, केसी वेणुगोपाल सहित पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेता बैठक में मौजूद रहेंगे। इस मीटिंग में चुनाव के नतीजों पर चर्चा होने की संभावना है।

महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव 21 अक्टूबर को संपन्न हुए हैं। परिणाम 24 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। कई एग्जिट पोल ने दोनों राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए शानदार जीत की संभावना जताई जा रही है।

एग्जिट पोल के अनुमान के मुताबिक, बीजेपी-शिवसेना गठबंधन महाराष्ट्र की 288 सीटों में से 211 और कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) गठबंधन 64 सीटें जीत सकती है। 

हरियाणा में भाजपा को 90 में से 66 सीटें जीतने की संभावना है, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 14 सीटें मिलती दिखाई दे रही है। हालांकि, कांग्रेस ने अब तक एग्जिट पोल की संभावनाओं को खारिज कर दिया है।

कांग्रेस नेतृत्व का मानना ​​है कि बीजेपी ने आर्टिकल 370 और अन्य मुद्दों पर चुनाव लड़ा, लेकिन जमीनी स्थिति अलग है क्योंकि लोगों ने स्थानीय मुद्दों और जाति के आधार पर वोट दिया है। एक पार्टी नेता ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान एक पैटर्न दिखाता है क्योंकि शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में कम मतदान देखा गया है।

कांग्रेस प्रवक्ता मीम अफजल ने पार्टी के दोनों राज्यों में वापसी करने का दावा करते हुए कहा 'हम एग्जिट पोल में विश्वास नहीं करते हैं।'पार्टी के एक नेता ने कहा कि पूर्व पार्टी प्रमुख राहुल गांधी ने दोनों राज्यों में कम बैठकों को संबोधित किया, लेकिन वे आर्थिक मंदी पर एक संदेश देने में सक्षम रहे। बता दें कि कांग्रेस ने 2014 में दोनों राज्यों में सत्ता गंवा दी थी। 

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