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उपचुनाव के नतीजे से नहीं सधेगा सपा का मिशन 2022

October 30th, 2019 09:04 IST
उपचुनाव के नतीजे से नहीं सधेगा सपा का मिशन 2022

हाईलाइट

  • उपचुनाव के नतीजे से नहीं सधेगा सपा का मिशन 2022

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। समाजवादी पार्टी अभी हाल में हुए उपचुनाव में तीन सीटें जीतकर भले ही खुश हो, मगर सच तो यह है कि इसने जो सीटें जीती हैं, उसमें सपा का मर्जिन न के बराबर है। इन नतीजों के सहारे सपा का मिशन 2022 सधता नहीं दिख रहा है।

इस जीत में संगठन की कोई विशेष रणनीति नहीं दिखी। सिर्फ समीकरण और संयोग बने हैं, जिस कारण सपा को जीत मिली है। इस जीत में पार्टी का सत्ता विरोधी लहर और पार्टी के परफार्मेस दोनों का कोई योगदान नहीं दिखा है। इस चुनाव में प्रत्याशी का जनाधार तो दिखा, लेकिन पार्टी का कोई विशेष सहयोग नहीं दिखा।

उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा उपचुनाव की 11 सीटों में सर्वाधिक चर्चित सीट रामपुर ही थी। पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां को भू-माफिया घोषित किया गया, और वह अभी भी 84 मुकदमों से राहत पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सपा मुखिया अखिलेश यादव विशेषकर इस सीट के लिए प्रचार भी करने गए।

आजम खां ने प्रचार के दौरान कई सभाओं में आंसू बहाए, तब जाकर उन्हें महज 7589 वोटों से जीत मिली है। पार्टी जिस हिसाब से आजम के पक्ष में कूदी थी, उस हिसाब से उनकी जीत का अंतर बढ़ना चाहिए था, लेकिन वह हुआ नहीं।

साल 2017 में आजम ने यहां पर 1,02100 वोट पाकर बड़ी जीत दर्ज की थी। तब भाजपा को यहां से महज 25.84 प्रतिशत वोट मिले थे। जबकि भाजपा ने इस उपचुनाव में 44.34 प्रतिशत वोट हासिल किया है। उसके वोट प्रतिशत में करीब 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इस बार तो उसकी तैयारी फतह करने की थी लेकिन सफलता नहीं मिली। भाजपा को रामपुर में अपनी जमीन बनाने का मौका जरूर मिल गया है।

अगर जैदपुर सीट पर देखें तो सपा प्रत्याशी गौरव रावत 78,172 मत पाकर 4,165 मतों के अंतर से चुनाव जीते। पहले चरण से लेकर 10वें चरण तक भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशी के मध्य कांटे की टक्कर रही। इसके बाद भाजपा और सपा में शुरू हुई रस्साकसी अंतिम समय तक जारी रही। यहां पर कांग्रेस के प्रत्याशी तनुज पुनिया द्वारा भाजपा के वोटो पर सेंधमारी, मसौली और सिद्धौर ब्लॉक भाजपा के गढ़ पर ज्यादा वोट न मिलना हार का कारण बना और इसी का फायदा सपा को मिला।

जलालपुर सीट पर सपा को काफी मशक्कत करनी पड़ी है। बसपा प्रत्याशी लगातार बढ़त बनाए हुई थीं। यहां उनकी टक्कर भाजपा प्रत्याशी से दिख रही थी, लेकिन आखिरी राउंड आते-आते सपा प्रत्याशी ने बढ़त बनाकर जीत अपनी झोली में डाल ली। सपा के सुभाष राय (72,589) बसपा की डॉ. छाया वर्मा (71,813) पर सिर्फ 776 मतों से जीत दर्ज कर पाए थे। यहां पर सपा और बसपा को लगभग 35 -35 मत प्रतिशत हासिल हुए हैं।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राजीव श्रीवास्तव ने कहा, जब चुनाव में कम समय बचा हो तब कोई उपचुनाव हो तो सेमीफाइनल माना जाता है। अभी इसे सेमीफाइनल कहना ठीक नहीं है। सपा जिस प्रकार 2017 व 19 में लगातार हार रही थी, ऐसे में इन तीन सीटों पर जीत उत्साहजनक और कार्यकर्ताओं में जोश भरने वाली है। लेकिन पार्टी की रणनीति के हिसाब से सपा इसे बड़ी विजय मानने की भूल न करे।

उन्होंने कहा कि यह विजय सपा संगठन, पार्टी कार्यकर्ता की वजह से कम दिख रही है। जैसा समीकरण रहा है, उसमें दो प्रत्याशी अच्छा लड़ गए तो तीसरे वाले ने फायदा उठा लिया। अगर पार्टी के परफार्मेस की जीत होती तो आजम खां की सीट का मर्जिन घटता क्यों!

यह समीकरण और संयोग तीनों सीटों पर देखे गए। भाजपा ने 11 में से 8 सीटें जीती हैं, इसलिए इसे सत्ता विरोधी लहर भी नहीं कहा जा सकता। अब सपा को जरूरत है कि पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बरकार रखे, संगठन का पुनर्गठन करे। सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला अब हर पार्टी को अपनाना होगा।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।