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अयोध्या मामला : निर्मोही अखाड़े का दावा सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज, जानें क्या था दावा

अयोध्या मामला : निर्मोही अखाड़े का दावा सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज, जानें क्या था दावा

हाईलाइट

  • अयोध्या मामले में कोर्ट ने सुनाया फैसला
  • निर्मोही अखाड़े का दावा कोर्ट ने किया खारिज

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक बन गया है। बरसों से चला आ रहे अयोध्या विवाद का आखिरकार अंत हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन रामलला की है। वहीं मुस्लिम पक्ष को कहीं और पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन दी जाएगी। कोर्ट ने इस मामले में निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया है। 

निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट को अक्टूबर में दस्तावेज सौंपे थे। अपने लिखित दलील में निर्मोही अखाड़े ने कहा था कि विवादित जमीन का आंतरिक और बाहरी हिस्सा भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में मान्य है। हम रामलला के सेवायत हैं। हमारे अधिकार में ये वर्षों से रहा है। 

उन्होंने अपनी दलील में कहा था कि हमें रामलाल के मंदिर का पुनर्निर्माण और सेवा का अधिकार मिलना चाहिए। वक्फ बोर्ड का विवादित भूमि पर लंबे समय से अधिकार रहा है। इसकी तस्दीक हिंदुओं समेत सभी पक्षकार कोर्ट में कर चुके हैं। ऐसे में अदालत निर्देश दे कि वक्फ बोर्ड उच्च न्यायालय के आदेश वाली अपने हिस्से की जमीन हमें लीज पर दे। ताकि हम वहां मंदिर बना सके। निर्मोही अखाड़े की दलील के अनुसार अदालत चाहे तो उत्तरप्रदेश सरकार को निर्देश देकर अयोध्या के अधिग्रहित जमीन के बाहरी इलाके में वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए जगह दिला दें। 

14 अखाड़ों में से एक
निर्मोही अखाड़ा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त 14 अखाड़ों में शामिल है। इसका संबंध वैष्णव संप्रदाय से है। वर्ष 1959 में बाबरी मस्जिद की विवादित भूमि पर अपना मालिकाना हक जताते हुए निर्मोही अखाड़ा ने पहली बार मुकदमा दायर किया था।

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