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SC: सुप्रीम कोर्ट ने सेना की पोस्टिंग में हस्तक्षेप करने से इनकार किया

November 17th, 2020 15:40 IST
SC: सुप्रीम कोर्ट ने सेना की पोस्टिंग में हस्तक्षेप करने से इनकार किया

हाईलाइट

  • सुप्रीम कोर्ट ने सेना की पोस्टिंग में हस्तक्षेप करने से मना किया

नई दिल्ली, 16 नवंबर (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सेना की पोस्टिंग का मामला ऐसा है, जिस पर वह हस्तक्षेप नहीं करना चाहता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी को लद्दाख जैसे कठिन स्थानों पर भी सेवा देनी होगी।

शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एक कर्नल की ओर से दायर एक अपील पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें उन्हें और उनकी पत्नी, जोकि सेना में एक कर्नल है, उन्हें 15 दिनों के भीतर अपने नया पदभार संभालने का निर्देश दिया था।

न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, इंदु मल्होत्रा और इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि चाहे वह लद्दाख हो, पूर्वोत्तर हो या अंडमान एवं निकोबार द्वीप हो, किसी को भी वहां जाना होगा।

पीठ ने कहा, आपको शिकायत हो सकती है, लेकिन सेना में पोस्टिंग ऐसी चीज है, जिस पर हम हस्तक्षेप नहीं करना चाहेंगे। पीठ ने सेना में दंपति की संयुक्त पोस्टिंग के लिए किसी भी आदेश को पारित करने से इनकार कर दिया गया।

याचिकाकर्ता ने राजस्थान के जोधपुर से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अपनी पोस्टिंग को चुनौती दी है। उनकी पत्नी पंजाब के भटिंडा में कार्यरत है।

याचिकाकर्ता, जज एडवोकेट जनरल (जेएजी) विभाग के एक अधिकारी हैं, जिन्होंने 15 मई के पोस्टिंग ऑर्डर को हाई कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्हें और उनकी पत्नी को दूर के स्थानों पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है। अधिकारी ने जेएजी और अन्य के खिलाफ अपील दायर करते हुए दोनों की एक साथ पोस्टिंग करने की मांग की।

याचिकाकर्ता के वकील ने शीर्ष अदालत के समक्ष दलील देते हुए कहा कि भटिंडा से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बीच की दूरी 3,500 किलोमीटर से अधिक है और अधिकारियों का साढ़े चार साल का बच्चा है। वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को इस स्थानांतरण के कारण स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन करना पड़ सकता है।

पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत को पोस्टिंग के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि ये बहुत ही कठिन मामले हैं और शीर्ष अदालत के लिए विचार करना मुश्किल है।

15 सितंबर को हाईकोर्ट ने सेना को चार सप्ताह के भीतर संयुक्त पोस्टिंग के लिए युगल के अनुरोध पर निर्णय लेने के लिए कहा था।

एकेके/एसजीके

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।