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अगर सोनिया गांधी मेरी सलाह मान लेती तो आज राहुल गांधी प्रधानमंत्री होते - TDP MP

July 06th, 2018 21:16 IST
अगर सोनिया गांधी मेरी सलाह मान लेती तो आज राहुल गांधी प्रधानमंत्री होते - TDP MP

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तेलगु देशम पार्टी (TDP) के सांसद और व्यवसायी जेसी दिवाकर रेड्डी का विवादित बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की पूर्व प्रेसिडेंट सोनिया गांधी को उन्होंने एक सलाह दी थी। यह सलाह अगर वह मान लेती तो उनके बेटे और INC के अध्यक्ष राहुल गांधी 2014 में प्रधानमंत्री होते। मैंने सोनिया गांधी को राहुल गांधी की शादी एक ब्राह्मण लड़की से करने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने इस सलाह को नहीं माना।

बुधवार को एक सभा को संबोधित करते हुए रेड्डी ने कहा कि, 2014 से पहले जब मैं कांग्रेस में था तो मैंने सोनिया गांधी को उस वक्त होने वाले लोकसभा चुनाव जीतने का तरीका बताया था। हमें उस वक्त उत्तर प्रदेश में वोट की जरुरत थी, जिसके लिए यूपी में ब्राह्मणों को लुभाना जरूरी था। ब्राह्मणों की संख्या यूपी में बहुत ज्यादा है। इसी वजह से मैंने सोनिया गांधी को राहुल की शादी एक ब्राह्मण लड़की से करवाने की सलाह दी थी। इससे हो सकता था कि यूपी में बाकी हिंदू कम्युनिटी के वोट पाने में भी हम कामयाब होते और हम लोकसभा चुनाव जीत जाते, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया।

इससे पहले भी राहुल गांधी का नाम रायबरेली की MLA अदिति सिंह से जुड़ चुका है, लेकिन अदिति सिंह ने बाद में एक बयान में कहा था कि राहुल गांधी उनके भाई जैसे हैं।

रेड्डी ने न केवल यह बयान दिया बल्कि इसके पीछे छिपे तर्क को भी समझाया। उन्होंने बताया कि यदि कोई प्रधानमंत्री बनने की चाहत रखता है, तो उसके पास यूपी के लोगों का प्यार और वहां की जनता का आशीर्वाद होना बहुत जरूरी है। तभी यह संभव है। उन्होंने कहा कि वह कई बार चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन अगर वह 2014 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े होते तो वह अपनी बची डिपोज़िट्स भी खो देते।

बता दें कि रेड्डी अनंतपुर संसदीय सीट से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर छह बार विधायक रह चुके हैं। 2014 में लोकसभा चुनावों से पहले वह TDP में शामिल हो गए थे। 2017 में उन्होंने विशाखापत्तनम एयरपोर्ट पर स्टाफ से बेमतलब बेहस की थी। इसकी वजह से सात फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गई थी। रेड्डी को इसके बाद सस्पेंड कर दिया गया था। हालांकि कुछ समय बाद उन पर से प्रतिबंध हटा लिया गया।  

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।