दिल्ली: शिक्षक विश्वविद्यालय विधेयक विधानसभा से हुआ पारित, आप सरकार ने कहा शिक्षक प्रशिक्षण में एक नया मानदंड

January 5th, 2022

हाईलाइट

  • भारत को विश्वगुरु बनने के लिए प्रेरित करेंगे शिक्षक

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली । दिल्ली विधानसभा ने मंगलवार को दिल्ली शिक्षक विश्वविद्यालय विधेयक पारित किया, क्योंकि सरकार ने जोर देकर कहा कि शहर-राज्य देश में शिक्षक प्रशिक्षण में एक नया मानदंड स्थापित करेंगे।

बिल पर चर्चा में भाग लेते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली शिक्षक विश्वविद्यालय से स्नातक करने वाले शिक्षक भारत को विश्वगुरु बनने के लिए प्रेरित करेंगे। कोई भी देश अपने राजनीतिक नेताओं के कारण विश्व नेता के रूप में विकसित नहीं होता है, यह शिक्षक ही हैं जो विश्वगुरु बनने के लिए देश का नेतृत्व करते हैं। सिसोदिया ने कहा कि इस विधानसभा द्वारा शिक्षक विश्वविद्यालय विधेयक पारित किया जा रहा है। इस के साथ  देश में शिक्षकों की गुणवत्ता को बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि दिल्ली का शिक्षक विश्वविद्यालय ऐसे प्रतिभाशाली शिक्षकों का उत्पादन करेगा जो इस देश को विश्वगुरु बनने के लिए प्रेरित करेंगे। यह देश में शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए एक नया मानदंड भी स्थापित करेगा। बक्करवाला गांव में 12 एकड़ जमीन में फैले इस विश्वविद्यालय में लेक्चर हॉल, डिजिटल लैब और 5,000 छात्रों के लिए विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ एक पुस्तकालय होगा।

सिसोदिया ने कहा कि जब तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों में चाणक्य जैसे शिक्षक थे, तब भारत की दुनिया भर में पहचान थी। भारत की शिक्षा प्रणाली पर दुनिया भर में चर्चा हुई। एक बार फिर, वे दिन लौट आएंगे और हमारे देश को विश्वगुरु के रूप में पहचाना जाएगा, और इसमें दिल्ली शिक्षक विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यूपी सरकार और प्रधानमंत्री पर केजरीवाल मॉडल की नकल करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली के ऐसा करने के बाद प्रधानमंत्री ने मेरठ में एक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखी। उन्होंने यह भी कहा कि वह देखना चाहते हैं कि मेरठ में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी कैसी बन रही है।

उन्होंने कहा कि यह देखकर अच्छा लगा कि मेरठ में खेल विश्वविद्यालय को दिल्ली के खेल विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है, क्योंकि आज तक न तो गुजरात और न ही किसी अन्य भाजपा शासित राज्य ने ऐसा कोई मॉडल बनाया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा शिक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। आज देश में केंद्र सरकार ने आईआईटी की फीस 90,000 रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये और आईआईएम की फीस 23 लाख रुपये कर दी है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे आम आदमी के बच्चों को इन संस्थानों में प्रवेश पाने में मुश्किल होगी।

 

एमएसबी/एसकेके