दैनिक भास्कर हिंदी: भटके बच्चों को परिजनों से मिलाया, स्कूल में पढ़ाई जाएगी इस बहादुर बेटी की कहानी

June 12th, 2018

हाईलाइट

  • 10वीं कक्षा की मराठी की पाठ्यपुस्तक में पढ़ाई जाएगी उनकी उपलब्धियां
  • पिछले चार सालों में चुपचाप बच्चों को बचाने की मुहिम में लगी हैं रेखा मिश्रा
  • रेखा मिश्रा ने कहा घर से भागे हुए बच्चों को सुरक्षा देना बहुत बड़ी जिम्मेदारी

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुंबई में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की सब-इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा ने विभिन्न वजहों से घर से भागे हुए बच्चों को बचाने की अनोखी मुहिम शुरू की है। ज्ञात हो कि हर साल बड़ी संख्या में बच्चे विभिन्न वजहों से घर से भाग कर मुंबई बहुंचते हैं। इस महिलाकर्मी ने ऐसे बच्चों का पता लगा कर उन्हें उनके परिजनों से मिलाने का बड़ा अभियान शुरू किया है। वह पिछले काफी समय से चुपचाप संकट में पड़े बच्चों के जीवन में उजाला भरने का काम करने में लगी हैं। उनके इस महान काम को अब जा कर मान्यता मिलनी शुरू हुई है। बाल-सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए उनके काम को महाराष्ट्र के उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों की पाठ्य पुस्तकों में स्थान देने का निर्णय लिया है। 

10वीं में पढ़ाई जाएगी गौरवगाथा 
मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल में आरपीएफ की सब इंस्पेक्टर रेखा मिश्रा (32) को यह उपलब्धि अब जा कर हासिल हुई है, लेकिन वह कई सालों से चुपचाप अपना काम कर रही हैं। रेखा मध्य रेलवे में कार्यरत हैं। उन्होंने पिछले कुछ सालों में सैकड़ों निराश्रित, लापता, अपहृत या घर से भागे हुए बच्चों को विभिन्न रेलवे स्टेशनों से बचाया है। बच्चों को बचाने के साहसिक कार्य और इस दौरान उनके सामने आने वाली बाधाओं को इस शैक्षणिक सत्र में महाराष्ट्र राज्य बोर्ड के कक्षा 10 की मराठी की पाठ्यपुस्तक में पढ़ाने का निर्णय लिया गया है। 
मिलेगी नई पीढ़ी को प्रेरणा 
उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के एक सैन्य अफसर के परिवार से संबंध रखने वाली रेखा मिश्रा ने 2014 में आरपीएफ ज्वाइन की थी। वर्तमान में वह प्रसिद्ध छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल (सीएसएमटी) पर कार्यरत हैं। मध्य रेलवे के महाप्रबंधक डीके शर्मा ने एक विशेष समारोह में उन्हें सम्मानित किया। शर्मा ने कहा उन्होंने समाजसेवा के क्षेत्र में अनोखी पहल की है। एक पुलिस अधिकारी के रूप में उनके इस काम को समाज हमेशा याद रखेगा। उन्हें स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। 

सावधानी रखें तो बचाए जा सकते हैं बच्चे 
सम्मानित किए जाने पर रेखा मिश्रा ने कहा कि यह मेरे लिए बड़े गर्व की बात है। हमारे देश में हर साल बहुत बड़ी संख्या में, विभिन्न वजहों से, बच्चे घर से भागते हैं। घर से भागे हुए बच्चों को सुरक्षा देना बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। ज्यादातर बच्चे घर में परिजनों से लड़ाई के बाद भागते हैं। कुछ फेसबुक पर बने दोस्तों से मिलने के लिए भागते हैं। कभी-कभी वे अपने पसंदीदा फिल्मी कलाकारों से मिलने या फिल्मों की चकाचौंध से प्रभावित हो कर घर से भागते हैं। जबकि बहुत सारे बच्चों को आपराधिक षडयंत्रों का शिकार हो कर घर छोड़ना पड़ता है। इनमें से अधिकांश बच्चे अनजाने में ही अपराध की दुनिया में जा पहुंचते हैं। रेखा मिश्रा ने कहा कि हम अपने आसपास के परिवेश पर नजर रखें तो इनमें से बहुत सारे बच्चों को बचाया जा सकता है। 

4 सालों में 430 बच्चों को बचाया 
रेखा ने बताया कि उनकी टीम सुनिश्चित करती है कि ऐसे बच्चे (खासकर आसानी से फुसलाए जा सकने वाले बच्चे) गलत हाथों में पहुंचकर किसी तरह की परेशानी में नहीं पड़ जाएं। टीम का लक्ष्य बच्चों को उनके परिवार से मिलाना होता है। पिछले चार सालों में रेखा और उनकी चौकन्नी टीम ने ऐसे 430 से ज्यादा बच्चों को बचाया। इनमें 45 नाबालिग बच्चियां, एक मूक-बधिर बच्चा तथा कई ऐसे बच्चे भी थे जो हिंदी नहीं जानते थे। ऐसे बच्चों से बातचीत के लिए दुभाषिए को बुलाया गया। उन्होंने बताया कि उनमें ज्यादातर बच्चे उत्तर प्रदेश और बिहार के थे। ऐसे बच्चों की संख्या गर्मी की छुट्टियों के समय अक्सर बढ़ जाती है।