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इटली में तीसरी लहर से एक दिन में गई थी 29 हजार लोगों की जान, भारत में भी देगी दस्तक, पढ़ें इस बार किसको है खतरा

इटली में तीसरी लहर से एक दिन में गई थी 29 हजार लोगों की जान, भारत में भी देगी दस्तक, पढ़ें इस बार किसको है खतरा

हाईलाइट

  • भारत में कोरोना की तीसरी लहर देगी दस्तक
  • इस बार कोरोना वायरस की चपेट में आएंगे बच्चे
  • सुप्रीम कोर्ट ने तीसरी लहर को लेकर जताई चिंता

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कोरोना की तीसरी लहर कितनी भयावह हो सकती इसका अंदाजा आप इटली, फ्रांस, नीदरलैंड में हो रही मौतों से लगा सकते हैं। विश्व के कई देशों में कोरोना की तीसरी लहर ने अपनी दस्तक दे दी है। जबकि, इन देशों में अधिकांश जनता को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है पर अब यह वायरस एशियाई देशों की तरफ़ बढ़ रहा है। भारत में कोरोना की दूसरी लहर ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कमर तोड़ दी है। हज़ारो की तादाद में लोग ऑक्सीजन, बेड और दवाइयों के लिए कतारों में खड़े है। हर रोज संक्रमितों एवं मरने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। इस दौरान अगर तीसरी लहर भारत में आती हैं तो क्या भारत इस लहर को रोकने के उतनी मुस्तैदी दिखा पाएगा जितनी यूरोपियन देशों ने दिखाई।

दूसरे देशों का हाल 
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार भारत को छोड़कर विश्व के कई देशों में तीसरी लहर ने अपनी दस्तक दे दी है या देनी वाली है।

जर्मनी
फरवरी के अंत में इस वायरस का कहर जर्मनी में शुरू हुआ था। फरवरी के अंत तक स्कूल, व्यापार, कॉलेज खोले जाने थे पर वायरस के नए स्टैन की वजह से वहां पर लॉकडाउन लगाने की जरुरत पड़ गई। जर्मनी में पहली दो वेब ने उतना कहर नहीं बरपाया था जितना तीसरी लहर ने बरपाया। वहां एक दिन में कुल 29 हज़ार लोगों की मौत हुई थी। इस वायरस का सबसे ज़्यादा असर युवा आबादी पर हुआ है।

इटली 
इटली में तीसरी लहर के बचाव के लिए सरकार ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को वैक्सीन लगवाने की कोशिश कर रही हैं। बता दें जनवरी में इटली में कुल 12 हज़ार मामले थे, जो अप्रैल में बढ़कर 20 हज़ार के पार पहुंच गए। इटली में 15 से 49 वर्ष के लोगों इस संक्रमण से ज़्यादा प्रभावित है।

फ्रांस
फ्रांस में पहले भी कोरोना वायरस ने अपना कहर ढाया था। उस वक्त भी सबसे ज़्यादा मौतें हुई थी और आज भी गुरुवार को फ्रांस में कुल 1 लाख लोगों की मौत हो गई है। वहीं, देश में तीसरा राष्ट्रीय लॉकडाउन घोषित किया गया है। इस दौरान कॉलेज, स्कूल, व्यापार सभी पर पाबंदी होगी। देश में शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू लगाया है।

नीदरलैंड
नीदरलैंड में कोरोना संक्रमण का दर 35 फीसदी बढ़ गया है, बुधवार को कुल 5 हज़ार मामले दर्ज़ किए गए है। जिसके कारण नीदरलैंड में लॉकडाउन बढ़ाया गया है। सरकार जहां 28 अप्रैल से लॉकडाउन हटाने की सोच रही थी। वहीं, बढ़ते संक्रमण के कारण उन्हें लॉकडाउन बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा।

क्यों आ सकती हैं तीसरी लहर
राघवन ने बताया कि जिस तरह से संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है उससे साफ़ है कि भारत में तीसरी लहर अपनी दस्तक देगी। उन्होंने आगे कहा कि पहले बार जब कोरोना वायरस आया था तब इतने वैरिएंट्स मौजूद नहीं थे। जितने दूसरी लहर में पाए गए। इसका साफ़- साफ़ मतलब है कि कोरोना के नए वैरिएंट्स तीसरी लहर का कारण बन सकते हैं। कोरोना की दूसरी लहर आने के पीछे एक बड़ी वजह है कि वायरस का रुप हर बार बदल रहा हैं।

लोगों पर इसका असर
राघवन ने आगे बताया कि पहली बार जब वायरस आया था तब लोगों की इम्यूनिटी बेहतर थी, जिसकी वजह से कम से कम लोग पर संक्रमण का असर हुआ।इस बार लोगों की इम्यूनिटी पहले के मुक़ाबले कमजोर हैं, इसीलिए पहले जो इस संक्रमण का शिकार हो गए थे। उन्हें भी संक्रमण ने दुबारा अपनी चपेट में लिया। कोरोना की दूसरी लहर के वापस आने का एक मुख्य कारण यहां के लोगों की कमजोर इम्यूनिटी और असावधानी है। उन्होंने आगे कहा कि अगर आमजनता अभी भी लापरवाही करने से नहीं बचेंगी तो तीसरी लहर आ सकती है।

नए वैरिएंट्स ने कमर तोड़ी
भारत में पहली बार इस वायरस का असर इसलिए भी नहीं हो पाया था क्योंकि भारत में जिन लोगों को कोरोना हुआ था। उनमें इम्यूनिटी बिल्डअप हुई थी।वहीं, मास्क और दो गज की दूरी से लोगों की जान बची थी। राघवन ने बताया कि टीका, कोरोना के नए वैरिएंट्स के खिलाफ़ काफ़ी असरदार हैं।लेकिन, भारत समेत अलग- अलग देशों में नए वैरिएंट्स पाए जाएंगे, जो ज़्यादा संक्रमाक होंगे। भारत एवं अन्य देश इस वैरिएंट्स के खिलाफ़ कारगर टूल बनाने की कोशिश कर रहे है।

नया तरीका ढूंढेगा वायरस
भारत के प्रिसिंपल साइंटिफिक अडवाइजर के.विजय राघवन ने बताया कि भारत में जिस तरह से नए वैरिएंट्स मिल रहे है, उससे आने वाले वक्त में भारत तीसरी लहर का शिकार होगा। भारत के लोगों की गिरती इम्यूनिटी इस लहर का मुख्य कारण बनेगी। इस वायरस का असर इस बार सबसे ज़्यादा बच्चों पर होगा। राघवन ने बताया जब ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को वैक्सीन लग जाएगी। तब वायरस अलग तरीके से लोगों को अपनी चपेट में लेने की कोशिश करेगा। उन्होंने आगे कहा कि वायरस अपना रुप बदलता रहेगा। इसीलिए हमें भी अपनी रणनीति एवं पहलुओं पर ज़्यादा से ज़्यादा काम करना होगा। वायरस का कोई भी वैरिएंट हो वह ह्ममून टू ह्ममून फैलेगा। विश्व के सभी वैज्ञानिक इस वैरिएंट् को रोकने के लिए काम कर रहे है।


बच्चों को ज़्यादा खतरा
जहां पहली लहर ने ज़्यादा से ज़्यादा बुजुर्गों पर अपना कहर बरपाया था। वहीं, दूसरी लहर ने नौजवानों पर और अब तीसरी लहर 18 से कम उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में लेगी। WHO की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस के नए वैरिएंट्स B117 पहली बार ब्रिटेन में पाए गए थे। कई वैज्ञानिकों का माना हैं कि यह वैरिएंट बच्चों क लिए काफ़ी खतरनाक होंगे। माना जा रहा, कि यह मूल वायरस से 50 फीसदी ज़्यादा खतरनाक है,इसका संक्रमण दर बाकी वायरस के मुक़ाबले ज़्यादा तेजी से बढ़ेगा।

केंद्र सरकार तीसरी लहर के लिए रहे तैयार
आज सुप्रीम कोर्ट में ऑक्सीजन की उपलब्धता को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि अभी तीसरी लहर आना बाकी हैं। ऐसे में ऑक्सीजन की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करें। सुनवाई के दौरान सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि- एक सर्वे से यह बात साफ़ होती हैं कि दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद हैं। केंद्र ने कहा, 'ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेन के जरिए आज 280 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई होनी है।' इसके साथ ही केंद्र सरकार ने कहा कि दिल्ली को यदि जरूरत से ज्यादा सप्लाई की जाएगी तो अन्य राज्यों की हिस्सेदारी प्रभावित होगी। बता दें, कि सुप्रीम कोर्ट ने चार मई को केंद्र सरकार से ऑक्सीजन प्लान मांगा था। जिसे लेकर केंद्र सरकार ने आज अपना पक्ष रखा है।




 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।