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ट्रांसपोर्ट यूनियन की हड़ताल का आज दूसरा दिन, दूध-सब्जी की किल्लत

July 21st, 2018 15:21 IST

हाईलाइट

  • ट्रांसपॉर्ट यूनियन की हड़ताल का दूसरा दिन
  • दैनिक उपभोग की चीजों की किल्लत
  • दूध सब्जियों और अन्य उपयोगी चीजों पर खासा प्रभाव

डिजिटल डेस्क,नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में पहले दिन ही ट्रांसपोर्ट यूनियन की हड़ताल का असर दखने को मिला, शुक्रवार को डीजल की बढ़ती कीमतों और जीएसटी को लेकर यह हड़ताल शुरू हुई जो आज दूसरे दिन भी जारी है। ऑल इंडिया मोटर्स ट्रांसपॉर्ट कांग्रेस (AIMTC) की हड़ताल से शहरों में दूध और सब्जियों की सप्लाई पर खासा प्रभाव पड़ रहा है। इस हड़ताल के चलते 90 लाख ट्रकों के पहिये थमे रहे।

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ई-वे बिल को आसान बनाया जाए
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि ई-वे बिल को सरल बनाया जाए और डीजल को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाए साथ ही यह मांग भी की जा रही है कि राजमार्गों को टोल मुक्त किया जाए ताकी तेज गति से ट्रांसपोर्ट हो सके। अपनी इन मांगों को लेकर ट्रक एसोसिएशन लंबे समय से सरकार के सामने अपना पक्ष रख रहे हैं, लेकिन उनके हाथ अब तक सिर्फ निराशा ही लगी है।

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नही निकला बैठक का ठोस नतीजा
हड़ताल के पहले AIMTC के पद अधिकारियों ने वित्त मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक की थी लेकिन इसका कोई संतोषजनक परिणाम नही निकला। यूनियन के सदस्यों का कहना है कि, 'हम सरकार से मिले भरोसे से संतुष्ट नहीं हैं।' ई-वे बिल को लेकर भी असंतुष्टी है अगर बिल फाइल करने में थोड़ी भी चूक हो जाती है तो बड़ा जुर्माना भुगतना पड़ता है। 

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अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी डीजल और पेट्रोल पर बहस
कल संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान भी डीजल और पेट्रोल को जीएसटी के अंतर्गत लाने पर चर्चा हुई जिसका जवाब खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिया। मोदी ने कहा कि यूपीए के समय भी प्रस्तावित जीएसटी से डीजल और पेट्रोल को अलग रखा गया था।

 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।