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कोरोना को हराने के बाद एम्स से डिस्चार्ज हुआ अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन, 4 दिन पहले मौत की अफवाह उड़ी थी

कोरोना को हराने के बाद एम्स से डिस्चार्ज हुआ अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन, 4 दिन पहले मौत की अफवाह उड़ी थी

हाईलाइट

  • मौत की अफवाह के 4 दिन बाद छोटा राजन ने दी कोरोना को मात
  • AIIMS से तिहाड़ जेल शिफ्ट किया गया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन को मंगलवार को एम्स से डिस्चार्ज कर वापस तिहाड़ जेल भेज दिया गया। कोरोना से संक्रमित होने के बाद छोटा राजन का 22 अप्रैल से जेल के अस्पताल में इलाज चल रहा था। हालत बिगड़ने पर उसे 25 अप्रैल को एम्स शिफ्ट किया गया था। इस बीच 7 मई को छोटा राजन की मौत की अफवाह उड़ी थी। हालांकि एम्स ने उसी दिन इस खबर का खंडन किया था।

बता दें कि राजन महाराष्ट्र में जबरन वसूली और हत्या से जुड़े कम से कम 70 आपराधिक मामलों का आरोपी है। मुंबई में उसके खिलाफ लंबित सभी मामलों को CBI को हस्तांतरित करने के बाद राजन के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत का गठन किया गया था। पत्रकार ज्योतिर्मय डे की 2011 की हत्या के मामले में उसे 2018 में दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

छोटा राजन और दाऊद इब्राहिम कभी एक ही गिरोह में हुआ करते थे, लेकिन 1993 मुंबई बम धमाकों के बाद छोटा राजन दाऊद से अलग हो गया था। इसके बाद से ही दाऊद राजन को मरवाना चाहता था। इससे बचने के लिए ही राजन ने गिरफ्तारी दे दी थी। बैंकॉक में भी दाऊद के गुर्गों ने छोटा राजन पर हमला किया था। इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसके पेट की आंत को खासा नुकसान पहुंचा था।

छोटा राजन को 25 अक्टूबर, 2015 को इंडोनेशिया के बाली शहर से गिरफ्तार किया गया था। दरअसल, छोटा राजन हमेशा वीओआईपी के जरिए कॉल करता था। राजन ने 24 अक्टूबर, 2015 को व्हाट्सएप के जरिए अपने एक शुभचिंतक को फोन किया था। इस कॉल को सुरक्षा एजेंसियों ने टेप कर लिया था। फोन पर छोटा राजन ने कहा था कि अब वह ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षित नहीं है और बहुत जल्द से यहां से निकल जाएगा।

इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। इंटरपोल ने भी राजन के देश छोड़कर निकलने के संबंध में अलर्ट जारी कर दिया। 25 अक्टूबर, 2015 को ऑस्ट्रेलियन फेडेरल पुलिस को खबर मिली कि भारतीय मूल का एक नागरिक बाली जा रहा है। फेडेरल पुलिस ने फौरन इंटरपोल के जरिए बाली इमिग्रेशन डिपार्टमेंट को इसकी सूचना दी और छोटा राजन को बाली पहुंचते ही एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया।

छोटा राजन को 6 नवंबर, 2015 की सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच विशेष विमान से बाली से दिल्ली के पालम एयरपोर्ट लाया गया। राजन ने प्लेन से उतरते ही सबसे पहले भारतीय धरती को चूमा था। भारत लाए जाने के बाद भी सुरक्षा कारणों के चलते उसे मुंबई की जेलों में नहीं रखा गया क्योंकि यह आशंका थी कि दाऊद समर्थित ग्रुप उसके खिलाफ षड्यंत्र रच सकते हैं और मुंबई की जेल में उस पर हमला हो सकता है। इस आशंका के मद्देनजर छोटा राजन को दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।