दैनिक भास्कर हिंदी: संघ का सुझाव, जहां देश हित की बात हो, वहां सरकार और जनप्रतिनिधियों पर डालें दबाव

August 16th, 2020

हाईलाइट

  • संघ का सुझाव, जहां देश हित की बात हो, वहां सरकार और जनप्रतिनिधियों पर डालें दबाव

नई दिल्ली, 16 अगस्त(आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) का मानना है कि किसी लोकतांत्रिक देश में राष्ट्रहित और जनहित से जुड़े विषयों पर सरकारों के सामने आवाज उठानी चाहिए। जनप्रतिनिधि, अगर जन हितों को लेकर उदासीन हैं तो उन पर भी दबाव की ताकत का प्रयोग करना चाहिए। आरएसएस के शीर्ष पदाधिकारियों में से एक और संगठन के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों को सचेत भी किया कि वे संगठन की ताकत का इस्तेमाल हमेशा सत्य और जनहित में करें। दत्तात्रेय होसबोले ने ताकत के इस्तेमाल को अंतिम अस्त्र बताते हुए कहा है कि इसके प्रयोग से पहले संवाद से समस्याओं को सुलझाने पर जोर दें।

दरअसल, भारतीय मजदूर संघ की ओर से आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम में कई पदाधिकारियों की ओर से देश हित में सरकार, जनप्रतिनिधियों और जनसंगठनों की भूमिका से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने ये बातें कहीं। भले ही यह कार्यक्रम भारतीय मजदूर संघ का था, मगर माना जा रहा है कि दत्तात्रेय होसबोले का यह बयान संघ के सभी सहयोगी संगठनों के लिए एक अहम सुझाव है।

दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्म शताब्दी लेक्च र सीरीज के तहत शनिवार को आयोजित हुए इस चर्चा सत्र के आखिर में दत्तात्रेय होसबोले ने पदाधिकारियों के सवालों का जवाब दिया था। इस दौरान भारतीय रेलवे मजदूर संघ के पदाधिकारी अशोक शुक्ला ने संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले से पूछा था कि सरकार पॉलिसी के बारे में सामाजिक संगठनों की जगह सांसदों और जनप्रतिनिधियों से वार्ता करने को प्राथमिकता देती है। लेकिन जिस सांसद की पृष्ठिभूमि श्रमिक या किसान की न रही हो, वह भला कैसे उनका प्रतिनिधित्व कर सकता है?

इस सवाल का जवाब देते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने कहा लोकतंत्र में किसान, मजदूर, महिला और विद्यार्थियों के जनसमूह की आवाज जितनी मजबूत होती है, लोकतंत्र में उस पर सरकार को विचार करना होता है। लेकिन आवाज उठाने के साथ यह भी देखना होगा कि सत्य क्या है, हितकारी क्या है, इस पर भी चर्चा होनी जरूरी है।

जनप्रतिनिधियों से जुड़े सवाल पर दत्तात्रेय ने कहा, उन्हें जनहित में काम करने के लिए दबाव में लाने का काम आपका है। इसके लिए लोकतंत्र में आपको कई औजार और मार्ग बताए गए हैं। आंदोलन करना, आवाज उठाना मार्ग है। अपने ताकत और बल पर आवाज उठाना चाहिए। लेकिन अंतिम अस्त्र का पहले दिन ही प्रयोग नहीं करना चाहिए। लोकतंत्र में संवाद ही सबसे बड़ा अस्त्र है।

संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने इस दौरान सरकारों के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कहा, कोई भी सरकार हो, चाहे वह भाजपा हो या कांग्रेस की, सभी सरकारें एक दायरे में काम करतीं हैं। अब सरकारों को इस दायरे से बाहर लाने के लिए कई व्यवस्थाएं हैं- जनसंगठन, मीडिया, न्यायालय इस काम को कर सकते हैं। दस मीडिया में संपादकीय आ गया तो सरकार भी संबंधित विषय पर सोचती है। न्यायालय के निर्णय पर भी सरकार काम करती है।

उन्होंने कहा कि जन संगठन, मीडिया, अदालत कई मार्ग हैं, जिनका उपयोग करना चाहिए। लेकिन, कब और कौन सी चीज का उपयोग करना है, यह अपने विवेक पर निर्भर करता है। विजडम(बुद्धिमानी) और स्ट्रेटजी(रणनीति) बहुत महत्वपूर्ण है।

इससे पूर्व भारतीय मजदूर संघ की जम्मू-कश्मीर इकाई के महामंत्री अशोक चौधरी के सवाल पर दत्तात्रेय होसबोले ने कहा था कि देशहित, उद्योग और श्रमिक हित में दबाव की ताकत का प्रयोग कर सकते हैं। जरूरी विषयों पर आवाज उठानी भी चाहिए। ताकत है तो चुप भी नहीं रहना है, लेकिन ताकत का दुरुपयोग भी नहीं करना है।

एनएनएम/आरएचए