दैनिक भास्कर हिंदी: H-1B वीजा से लेकर NSG सदस्यता पर यह बोले अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर

January 12th, 2018

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर भारत में अपना पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार मीडिया से मुखातिब हुए। गुरुवार को नई दिल्ली में अपने पहले नीतिगत भाषण में उन्होंने भारत और अमेरिका से जुड़े विभिन्न मसलों पर अपनी राय रखी। H1B वीजा मामले में जहां उन्होंने भारतीयों की चिंताओं को खारिज किया। वहीं NSG मेम्बरशिप के लिए एक बार फिर भारत के पूरे समर्थन की बात कही।

H-1B वीजा पर : अमेरिका प्रवासियों का देश है
केनेथ जस्टर ने H-1 वीजा पर अमेरिकी सरकार की नई प्रस्तावित पॉलिसी के बारे में उठ रही आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका प्रवासियों का देश है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा, 'H-1B वीजा नियमों पर समय-समय पर कुछ बदलाव किया जाता है। इस बार भी कुछ रिफाइन किया जा सकता है, लेकिन इसमें बुनियादी बदलाव नहीं होगा। प्रशासन इस तरह की कोई नीति नहीं ला रहा है जिससे लाखों प्रवासियों को अमेरिका छोड़ना पड़े।'

गौरतलब है कि कुछ समय से लगातार ऐसी खबरें चल रही हैं जिसमें कहा जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन की H-1 वीजा पर नई पॉलिसी के चलते 7 लाख से ज्यादा भारतियों को अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है।

NSG सदस्यता पर पूरा समर्थन
केनेथ जस्टर ने कहा कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) में भारत की सदस्यता के लिए अमेरिका अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है और उसकी पूरी कोशिश है कि भारत NSG में शामिल हो। उन्होंने कहा कि भारत NSG सदस्यता के लिए जरूरी चीजों को पूरा करता है। हमारा भारत को पूरा समर्थन है।

बता दें किभारत परमाणु व्यापार का नियंत्रण करने वाले 48 सदस्यीय समूह एनएसजी में शामिल होने की कोशिश कर रहा है लेकिन चीन बार बार भारत की कोशिशों में अड़चन डालता रहा है।

चीन छोड़ रही अमेरिकी कंपनियां
जस्टर ने कई अमेरिकी कंपनियों ने चीन में कारोबार करने में मुश्किलें बढ़ने की बातें कही हैं। उन्होंने कहा, कुछ अमेरिकी कंपनियां चीन से अपना परिचालन कम कर रही हैं जबकि कुछ अन्य कंपनियां दिलचस्पी से वैकल्पिक बाजार तलाश रही हैं। ऐसे समय में भारत व्यापार व निवेश के जरिये हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों का वैकल्पिक केंद्र बन सकता है।

भारत-US लगातार आतंकवाद का निशाना बने
जस्टर ने अपने भाषण में भारत और अमेरिका दोनों देशों को आतंकवाद से पीड़ित बताया। उन्होंने कहा, 'भारत और अमेरिका दोनों ने ही बड़ें आतंकवादी हमले झेले हैं। हमें लगातार निशाना बनाया गया। हमारे बीच ये तय हुआ है कि समाज के लिए खतरा बने आतंकवाद को खत्म कर देंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप साफ कर चुके हैं कि हम आतंकवाद बर्दाश्त नहीं करेंगे और कहीं भी आतंकवादियों का पनाहगाह नहीं रहने देंगे।