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चीन को झटका: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी से फोन पर बात की, जी-7 समिट में शामिल होने का न्योता दिया

चीन को झटका: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी से फोन पर बात की, जी-7 समिट में शामिल होने का न्योता दिया

हाईलाइट

  • पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत
  • राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को जी-7 में शामिल करने की भी इच्छा जताई
  • कोरोना वायरस, WHO, G-7 को लेकर हुई बात

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली/वाशिंगटन। लद्दाख में भारत और चीन सीमा पर विवाद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की है। उन्होंने पीएम मोदी को जी-7 समिट में शामिल होने का न्योता दिया है। यही नहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को जी-7 में शामिल करने की भी इच्छा जताई है। जानकारी अनुसार दोनों नेताओं के बीच कोरोना महामारी, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में सुधार और जी-7 को लेकर बात हुई है। इसके अलावा ट्रंप ने भारत-चीन सीमा विवाद सहित कई मुद्दों पर बात की। कोरोना वायरस के खिलाफ जंग पर आपसी सहयोग पर दोनों नेताओं के बीच बात हुई। कुछ दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन के बीच मध्यस्थता को लेकर प्रस्ताव रखने की बात भी ट्वीट की थी, जिसको भारत और चीन दोनों ने सिरे से नकार दिया था।

अमेरिका में हिंसा को लेकर पीएम मोदी ने चिंता व्यक्त की
जानकारी अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप से बातचीत के दौरान कहा कि कोरोना के बाद के समय में इस तरह के मजबूत संगठन (जी-7) की जरूरत है। पीएम ने कहा कि इस सम्मेलन की सफलता के लिए अमेरिका और अन्य देशों के साथ मिलकर काम करना प्रसन्नता का विषय है। प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में जारी हिंसा को लेकर चिंता व्यक्त की और स्थिति के जल्द ठीक होने की कामना की। बता दें कि इस समय अमेरिका में कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयर्ड नाम के अश्वेत की मौत के बाद वहां हिंसा भड़क उठी। वाइट हाउस तक हिंसा पहुंचने के बाद डोनाल्ड ट्रंप को बंकर में छिपाना पड़ा था।

African Nova Scotians react to U.S. demonstrations against ...

क्या है जी-7?
जी-7 सात बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों का एक समूह है। इसमें फ्रांस, कनाडा, जर्मनी, इटली जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। इसे ग्रुप ऑफ सेवन भी कहा जाता है। ये सभी देश आपसी हितों के मामलों पर चर्चा के लिए हर साल मिलते हैं।

What is the G7? … Its Purpose and History of Influence

विश्व स्वास्थ्य संगठन में सुधार को लेकर हुई बात
दोनों नेताओं में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में सुधार और कोरोना वायरस को लेकर भी बातचीत हुई। बता दें कि हाल ही में अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से हटने का ऐलान किया था। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि WHO पूरी तरह से चीन के नियंत्रण में है। WHO बदलाव की प्रक्रिया शुरू करने में नाकाम रहा और अमेरिका विश्व स्वास्थ्य संगठन से अपना रिश्ता खत्म करेगा।

ब्ल्यूएचओ से क्यों खफा हैं डोनाल्ड ट्रम्प?
अमेरिका पहले ही डब्ल्यूएचओ की फंडिंग रोक चुका है। अब ट्रम्प ने डब्ल्यूएचओ के साथ सभी रिश्ते खत्म करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि हम डब्ल्यूएचओ के कोटे का फंड स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाली किसी दूसरी संस्था को देंगे। ट्रम्प ने कहा था कि डब्ल्यूएचओ पर चीन का पूरा नियंत्रण है। चीन उसे 4 करोड़ डॉलर देता है और अमेरिका एक साल में 45 करोड़ डॉलर की मदद देता है। दोनों ने हमारी मांग नहीं मानी, इसलिए हम डब्ल्यूएचओ से संबंध खत्म कर रहे हैं। 

White House Covid cases contradict Trump's message on opening ...

ट्रंप ने सोमवार को लद्दाख में संघर्ष हल नहीं निकालने पर चीन की निंदा थी
अमेरिका ने चीन द्वारा भारत के साथ लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर आक्रामकता दिखाने और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार संघर्ष का समाधान नहीं करने को लेकर चीन की निंदा की। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भारत के खिलाफ चीनी आक्रामकता के बारे में चिंता जाहिर करते हुए, विदेशी मामलों पर अमेरिकी हाउस कमेटी के अध्यक्ष इलियट एंगल ने सोमवार को कहा था कि बीजिंग एक बार फिर दिखा रहा है कि वह संघर्षों का अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार समाधान करने के बजाय अपने पड़ोसियों को धमकाने का इच्छुक है। एंगेल ने शी जिनपिंग सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देशों को समान नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने चीन से भारत के साथ सीमा संबंधी सवालों को हल करने के लिए मानदंडों का सम्मान करने और कूटनीति और मौजूदा तंत्र का उपयोग करने का आग्रह किया। 

Army chief General Naravane briefs Rajnath Singh on face-off with ...

लद्दाख पर भारत-चीन की सैन्य स्तरीय वार्ता का नतीजा नहीं निकला
बता दें कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा जारी है। यहां दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सामने कुछ ही दूरी पर आमने-सामने खड़ी है। ऐसे में गतिरोध हल करने के लिए दोनों देशों के सैन्य प्रतिनिधियों के बीच वार्ता मंगलवार को बेनतीजा रही। सरकारी सूत्रों ने बताया कि मेजर जनरल रैंक अफसरों के बीच डिवीजन कमांडर स्तरीय वार्ता मंगलवार दोपहर को हुई, लेकिन इसमें कोई नतीजा नहीं निकल सका है। वार्ता शुरू होने से पहले उत्तरी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी भी जमीनी हालात की समीक्षा के लिए लद्दाख पहुंच गए थे। सूत्रों ने बताया कि बैठक में कोई खास सफलता नहीं मिली, इस वजह से दोनों देशों के सैन्य नेतृत्व के बीच एक और वार्ता छह जून को होगी। भारतीय सेना प्रमुख एमएम नरवाणे को उम्मीद है कि गतिरोध का समाधान सैन्य स्तरीय वार्ता में निकल आएगा।

Chinese army now claims one entire valley in Ladakh, inducts ...

पहले भी कई बैठक बेनतीजा रहीं
इससे पहले भी भारत व चीन की सेना के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर कीा वार्ता हो चुकी है लेकिन किसी में कोई नतीजा नहीं निकला। इस बीच, चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारी संख्या में सैनिक भेजे हैं। इसे देखते हुए भारत ने भी सैनिकों की संख्या बढ़ाई है। पांच मई के बाद से दोनों देशों के सैनिक एलएसी पर चार जगहों पर एक-दूसरे के आमने-सामने हैं। दोनों पक्षों ने इन जगहों पर करीब एक हजार सैनिक तैनात किए। बाद में अतिरिक्त कुमुक भी भेजी गई। ताजा विवाद भारत द्वारा पूर्वी लद्दाख के पांगगोंग त्सो (झील) इलाके में एक खास सड़क और गलवान घाटी में डारबुक-शायोक-दौलत बेग ओल्डी सड़क को जोड़ने वाली एक सड़क को बनाने के प्रति चीन के विरोध से पैदा हुआ है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।