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Video Conferencing: कोरोना संकट के बीच 35 दिन बाद 16 और 17 जून को मुख्यमंत्रियों से चर्चा करेंगे पीएम मोदी, लग सकता है सख्त लॉकडाउन 

Video Conferencing: कोरोना संकट के बीच 35 दिन बाद 16 और 17 जून को मुख्यमंत्रियों से चर्चा करेंगे पीएम मोदी, लग सकता है सख्त लॉकडाउन 

हाईलाइट

  • 88 दिनों में 6वीं बार मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
  • केंद्र सरकार कोरोना के रोकथाम के लिए कुछ बड़े फैसले ले सकती है
  • देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 3 लाख के पार

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लागातार बढ़ती जा रही है। शुक्रवार शाम तक देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 3 लाख के पार हो चुकी है और अब हर दिन लगभग 10 हजार नए केस सामने आ रहे हैं। इन हालातों में एक बार सख्त लॉकडाउन लगाए जाने की अटकलें तेज हो गईं हैं। इस बीच अब एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ 35 दिन बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक करेंगे। कोरोना संकट को लेकर मुख्यमंत्रियों से यह उनकी 6वीं बार बातचीत होगी।

बताया जा रहा है कि पीएम मोदी 16 और 17 जून को देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत करेंगे। इमसें वह कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर समीक्षा करेंगे। अनलॉक-1 की स्थिति का जायजा भी लेंगे। बताया जा रहा है कि इस बातचीत के बाद केंद्र सरकार कोरोना के रोकथाम के लिए कुछ बड़े फैसले ले सकती है।

16 को कम और 17 को ज्यादा प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करेंगे पीएम
16 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करेंगे, जहां कोरोना की रफ्तार धीमी है या जहां कोरोना मरीजों की रिकवरी रेट काफी अच्छी है। इन राज्यों में पंजाब, असम, केरल, उत्तराखंड और झारखंड जैसे कई राज्य शामिल हैं। वहीं 17 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे, जिन राज्यों में कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार काफी ज्यादा है। 17 जून को पीएम नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात और राजस्थान समेत अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बात करेंगे।

88 दिनों में 6वीं बार मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
मोदी 88 दिनों में 6वीं बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करेंगे। इससे पहले उनकी मुख्यमंत्रियों के साथ पांच बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हो चुकी है। कोरोना काल में सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 20 मार्च को मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग से मीटिंग की थी। हालांकि, तब लॉकडाउन नहीं लगा था। इसके बाद उन्होंने दो अप्रैल, फिर 11 अप्रैल और 27 अप्रैल को वीडियो कांफ्रेंसिंग की थी। वहीं बाद में 11 मई को पांचवीं बार वीडियो कांफ्रेंसिंग से मुख्यमंत्रियों से कोरोना वायरस को रोकने से जुड़ीं तैयारियों पर चर्चा की थी। अब एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्रियों से अनलॉक 1 के बारे में फीडबैक लेने के साथ आगे की रणनीति तय करने के मकसद से वीडियो कांफ्रेंसिंग से मीटिंग करने जा रहे हैं।

क्या एक बार फिर लग सकता है लॉकडाउन?
लॉकडाउन क्या फिर लग सकता है? क्या ढील खत्म की जा सकती है? ये ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब हर कोई जानना चाहता है, लेकिन तस्वीर साफ नहीं हो पा रही, बल्कि और धुंधली हो जाती है। जब लोग महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की ये चेतावनी सुनते हैं कि लॉकडाउन फिर सख्त करना पड़ सकता है, जब राजस्थान अपनी सीमा सील कर देता है, जब कई राज्य लॉकडाउन बढ़ा देते हैं। उद्धव ठाकरे ने दरअसल मुंबई में बसों में चढ़ते वक्त धक्का-मुक्की होने का वीडियो सामने आने पर नाखुशी दिखाई और बुधवार को मुंबई में कहा कि अगर लोग पाबंदियों का पालन करने में नाकाम रहे तो राज्य में लॉकडाउन जारी रखना पड़ सकता है। वैसे महाराष्ट्र समेत कुछ राज्यों ने 30 जून तक लॉकडाउन बढ़ाने का एलान किया हुआ है। इनमें पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु, तेलंगाना, पंजाब, मिजोरम जैसे राज्य शामिल हैं। वहीं दिल्ली सरकार भी लॉकडाउन की बात कह चुकी है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने भी कंटेनमेंट वाले इलाकों में 30 जून तक लॉकडाउन जारी रखने की घोषणा की थी।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।