बीजेपी पर पाटीदार भारी: पाटीदार समुदाय से ताल्लुक रखने वाले नेता को क्यों बनाया गया गुजरात का सीएम? जाने बड़ी वजह

September 13th, 2021

हाईलाइट

  • गुजरात में भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री पद की कमान
  • भूपेंद्र पटेल पाटीदार समुदाय के बड़े नेता

डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। गुजरात में भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी गई है। आज (सोमवार) भूपेंद्र पटेल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। बीजेपी ने जैन समाज से आने वाले विजय रूपाणी को हटाकर एक पटेल समुदाय से ताल्लुक रखने वाले नेता को कमान सौपीं है। नए सीएम भूपेंद्र पटेल पाटीदार समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास को समर्पित संगठन सरदारधाम विश्व पाटीदार केंद्र के न्यासी हैं। पहली बार के बीजेपी विधायक भूपेंद्र पटेल का सीएम की कुर्सी तक पहुंचने का सबसे बड़ा कारण पाटीदार समुदाय ही माना जाता है। 

पाटीदार समुदाय की नाराजगी बनीं वजह

बता दें कि भूपेंद्र पटेल ने नगर पालिका स्तर के नेता से लेकर राज्य की राजनीति में शीर्ष पद तक काम किया है। जानकारों के मुताबिक राज्य में बड़ी संख्या में पाटीदार सुमदाय के लोग बीजेपी से नाराज चल रहे थे। ऐसे में साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी कोई गलती नहीं करना चाहती है। अनुमान है कि पाटीदार समुदाय का राज्य की करीब 71 विधानसभा सीटों पर प्रभाव है। बीजेपी को साल 2017 के विधानसभा चुनावों में पाटीदार समुदाय की नाराजगी के कारण नुकसान उठाना पड़ा था। इस चुनाव में सौराष्ट्र में पाटीदारों और कृषक समुदाय ने कांग्रेस को वोट किया था, हालांकि बीजेपी को शहरी इलाकों में ज्यादा वोट मिले और इस नुकसान की भरपाई हो गई थी। लेकिन बीजेपी अब समझ गई है कि अगर फिर से सत्ता में वापस आना है तो अब पाटीदार समुदाय को मिलकर चलना ही पड़ेगा।

पाटीदार समुदाय में पकड़ बनाने की कोशिश

गौरतलब है कि साल 2017 के चुनाव में बीजेपी ने 182 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 99 सीटों पर ही जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में पाटीदार समुदाय से आने वाले बीजेपी विधायकों की संख्या 28 थी। जबकि कांग्रेस के 23 विधायकों ने जीत दर्ज की थी। इस समुदाय पर बीजेपी की ढीली पड़ती पकड़ का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2012 के चुनाव में बीजेपी के 36 पाटीदार नेताओं ने जीत दर्ज कर विधानसभा का सफर तय किया था।

RSS के कई नेता इसी समुदाय से 

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के लिए पाटीदार समुदाय का समर्थन इसलिए भी जरूरी है कि क्योंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कई शीर्ष नेता इसी समुदाय से आते हैं। लोगों का यह भी मानना है कि भूपेंद्र पटेल के रूप में किसी लो-प्रोफाइल नेता की नियुक्ति पाटीदार वोट पाने और अन्य समुदायों को संदेश देने के लिए बीजेपी की चुनावी रणनीति का एक हिस्सा है। कहा यह भी जाता है कि भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाने की नींव पिछले महीने ही रखी जा चुकी थी,। जब जन-आशीर्वाद यात्रा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण और पूर्व सीएम केशुभाई पटेल को मरणोपरांत पद्म भूषण देने समेत पटेल समुदाय के राज्य में किए गए प्रयासों की सराहना की था। 

कौन है भूपेंद्र पटेल?

भूपेंद्र पटेल 2010 से 2015 तक गुजरात के सबसे बड़े शहरी निकाय अहमदाबाद नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे थे। सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा रखने वाले पटेल विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले स्थानीय राजनीति में सक्रिय थे। अहमदाबाद में जन्मे पटेल ने दुनिया के अनेक हिस्सों का दौरा किया है। पटेल के एक सहयोगी के अनुसार उन्हें आध्यात्मिक गतिविधियों में भाग लेना अच्छा लगता है और उन्हें क्रिकेट और बैडमिंटन पसंद है। पटेल को करीब से जानने वाले लोग उन्हें जमीन से जुड़ा नेता बताते हैं, जो लोगों से चेहरे पर मुस्कान के साथ मिलते हैं।

 
 

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