comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

चिंताजनक: देश के 85 प्रतिशत बालगृहों के हालात की हर माह नहीं होती पड़ताल, 2764 में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार रोकने के पर्याप्त उपाय तक नहीं

चिंताजनक: देश के 85 प्रतिशत बालगृहों के हालात की हर माह नहीं होती पड़ताल, 2764 में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार रोकने के पर्याप्त उपाय तक नहीं

हाईलाइट

  • 1504 बाल गृहों में शौचालय का अभाव
  • 2039 बाल गृहों का पंजीकरण ही नहीं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के 2764 बाल गृह संस्थानों में बच्चों को शारीरिक और मानसिक दुर्व्यवहार से बचाने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं हैं, जिससे बच्चों को गहरे आघात की समस्या से गुजरना पड़ता है। यह संख्या देश के कुल बाल गृहों की करीब 40 फीसदी है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की सोशल ऑडिट रिपोर्ट ने देश भर के चाइल्ड होम्स में सुविधाओं की पड़ताल की तो चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई। बेड, बॉथरूम, टॉयलेट आदि सुविधाओं की कमी सामने आई है। देश में कुल 7163 चाइल्ड होम हैं, जिसमें से 6299 होम्स का प्रबंधन एनजीओ के हाथ में है।

प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाले NCPCR की सोशल ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक जेजे एक्ट के हिसाब से 90 प्रतिशत चाइल्ड केयर होम्स में मैनेजमेंट कमेटी तो बन गई है, लेकिन बच्चों की देखभाल को लेकर होने वाली प्रत्येक महीने वाली मीटिंग सिर्फ 15 प्रतिशत चाइल्ड होम में ही होती हैं। बाकी 85 प्रतिशत बाल गृहों में रहने वाले बच्चों के हालात की हर महीने समीक्षा ही नहीं होती। रिपोर्ट से पता चला है कि 45 प्रतिशत बालगृहों के पास ही डॉक्टर्स उपलब्ध हैं। 23 परसेंट चाइल्ड होम्स के बच्चों को बाहर से खाना खाना पड़ता है। 30 प्रतिशत बालगृहों में चाइल्ड ट्रेनिंग नहीं हो पा रही है। 16 परसेंट चाइल्ड होम्स में फस्र्ट एड ट्रेनिंग नहीं हो रही।

मूलभूत सुविधाएं भी नहीं
चौंकाने वाली बात है कि देश के 12 प्रतिशत बालगृहों में बाथरूम तक नहीं है, जबकि 18 परसेंट में टायलेट तक नहीं है। जेजे एक्ट के लागू होने के चार सालों के बाद भी अभी तक प्रतिशत चाइल्ड होम्स में टॉयलेट के एंट्री और एक्जिट प्वाइंट पर कैमरा नहीं लगा है। 10 प्रतिशत बालगृहों में बेसिक मेडिकल उपरकरण भी नहीं है। जबकि कानूनन चाइल्ड होम्स चलाने के लिए ये अनिवार्य है। 14 परसेंट चाइल्ड होम्स में तो बाथरूम भी नियमों के हिसाब से नहीं है। चार फीसदी में तो पीने का साफ पानी तक भी नहीं है। लगभग 15 प्रतिशत बालगृहों में तो बच्चों के लिए अकेले बेड भी नहीं है।

1504 बाल गृहों में शौचालय का अभाव
रिपोर्ट के मुताबिक, 1504 बाल गृहों में शौचालय की सुविधा का अभाव है, वहीं 434 में शौचालय और स्नानगृह में निजता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। NCPCR के एक अधिकारी ने कहा कि ऐसे उपायों का अभाव वहां रहने वाले बच्चों के शारीरिक और भावनात्मक दुर्व्यवहार का कारण बन सकता है।

2039 बाल गृहों का पंजीकरण ही नहीं
रिपोर्ट के अनुसार 373 बाल गृह ऐसे हैं जहां किसी व्यक्ति के लिए प्रावधान, सफाई, मौसम और आयु के अनुरूप कपड़ों आदि का अभाव है। वहीं, 1069 बाल गृहों में बच्चों के लिए अलग से पलंग की व्यवस्था भी नहीं है। इसके अलावा रिपोर्ट बताती है कि 2039 यानी 28.5 फीसदी बाल गृह अभी तक पंजीकृत भी नहीं हैं।

कमेंट करें
iA8QJ
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।