दैनिक भास्कर हिंदी: Year Ender: सुप्रीम कोर्ट ने साल 2019 में सुनाए ये ऐतिहासिक फैसले

December 31st, 2019

हाईलाइट

  • अयोध्या विवाद सहित इन 7 मामलों में SC ने फैसले सुनाए
  • पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का रहा बड़ा योगदान

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकतंत्र के प्रमुख तीन अंगों में से भारतीय न्यायपालिका एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य अंग है। चाहे दशकों से चला आ रहा धर्म से जुड़ा अयोध्या विवाद हो या सरकार से जुड़ा कोई मुकदमा, साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम फैसले सुनाए। इसी कारण आने वाले समय में साल 2019, सुप्रीम कोर्ट के सभी ऐतिहासिक फैसलों के लिए याद किया जाएगा। आइए जानते हैं इस साल सुप्रीम कोर्ट ने किन 7 अहम मामलों पर फैसले दिए :

1. अयोध्या फैसला

अयोध्या का रामजन्मभूमि विवाद सिर्फ अयोध्या का ही नहीं, बल्कि देश का भी सबसे बड़ा विवाद था। यह विवाद दशकों से चल रहा था। अंतत: इस पर 40 दिन की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को अपना फैसला सुना दिया। यह तारीख भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से दर्ज की गई। कोर्ट ने विवादित जमीन पर मालिकाना हक रामलला को दिया और मुस्लिम पक्ष को किसी दूसरे स्थान पर 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन देने का फैसला किया। यह फैसला पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच द्वारा सुनाया गया।

कोर्ट के फैसले के बाद देश के प्रमुख शहरों में धारा 144 लागू की गई ताकि किसी भी जगह हिंसा न हो सके, लेकिन हिंदू और मुसलमानों ने इस बार एकता की मिशाल पेश की। देश के मुसलमान भले ही इस फैसले से असंतुष्ट न रहे हो, लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद जैसे कुछ मुस्लिम संगठनों ने असंतुष्टि जताई। इस फैसले पर मुस्लिम पक्षकारों द्वारा कुल 18 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गई। 12 दिसंबर को चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली 5 जजों की स्पेशल बेंच ने इन सभी 18 पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया। अब यह मामला खत्म हो चुका है।

2. RTI के दायरे में चीफ जस्टिस कार्यालय

13 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस (CJI) के कार्यालय के सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम 2005 के दायरे में आने का फैसला सुनाया। इस फैसले के तहत CJI का ऑफिस भी एक पब्लिक अथॉरिटी है, जिसके तहत यह भी RTI के दायरे में आएगा। साल 2007 में RTI एक्टिविस्ट सुभाष चंद्र अग्रवाल द्वारा जजों की संपत्ति जानने के लिए एक RTI आवेदन दाखिल किया गया था। जो CIC के आदेश के बाद भी आवेदक को सूचना नहीं दी गई।

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी जानकारी देने के आदेश दिए, साल 2010 में सुप्रीम कोर्ट के जनरल सेक्रेटरी और केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी, दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचे। अंतत: 9 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर पूर्ण विराम लगा दिया। यह फैसला भी पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संवैधानिक बेंच द्वारा सुनाया गया।

3. राफेल डील में मोदी सरकार को क्लीन चिट

लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस ने राफेल डील को मुद्दा बनाया था, लेकिन भाजपा ने भारी मतों से जीत हासिल की। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 14 नवंबर 2018 को 58 हजार करोड़ रुपए की इस राफेल डील में अनियमितताओं के खिलाफ जांच की मांग कर रही याचिकाएं खारिज कर दी गई। इस फैसले पर पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गई। सभी याचिकाओं पर शीर्ष अदालत ने 10 मई को सुनवाई खत्म की और 14 नवंबर को अंतत: केंद्र सरकार को क्लीन चिट दे दी। मामले में पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने फैसला सुनाया था।

4. राहुल गांधी को राहत

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने मानहानि का मामला दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि 'राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करने के लिए राफेल डील मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को तोड़मरोड़ कर पेश किया। इससे कोर्ट की अवमानना हुई है।'

इस मामले में दाखिल मानहानि की अर्जी पर कोर्ट ने सुनवाई के बाद 10 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। राहुल ने अपने बयान पर हलफनामे में अपनी गलती मानते हुए कोर्ट से माफी मांगी, जिसे कोर्ट ने 14 नवंबर को स्वीकार किया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राहुल को कोई बयान देते समय सतर्क रहने की हिदायत भी दी।

5. समझौते के आधार पर दुष्कर्म का मामला रद्द

केरल की एक युवती ने एक युवक पर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। बाद में दोनों के बीच समझौता हुआ तो युवती ने हलफनामे के साथ केरल हाईकोर्ट से मुकदमा वापस लेना चाहा, लेकिन केरल हाईकोर्ट ने मुकदमा रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट का कहना था कि 'सहमति से शारीरिक संबंध बनने के बाद भी यह मामला 376 के अंतर्गत आता है, इसलिए समझौते के बाद भी इसे रद्द नहीं किया जा सकता।'

हाईकोर्ट द्वारा मुकदमा निरस्त न किए जाने पर आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'युवती के हलफनामे और मामले की परिस्थिति देखते हुए हम मानते हैं कि इस मामले में आपराधिक कार्रवाई खत्म कर देनी चाहिए।' अंत में सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर चल रही कार्रवाई खत्म करने के आदेश दिए और कहा कि 'पूर्ण न्याय करने के लिए यह आवश्यक और अनिवार्य है।'

6. मेमोरी कार्ड अहम दस्तावेज

सुप्रीम कोर्ट ने 30 नवंबर को आपराधिक मामलों में मेमोरी कार्ड को अहम दस्तावेज घोषित किया। यह मामला यौन उत्पीड़न से जुड़ा हुआ था, जिसमें मलयाली अभिनेत्री के साथ दुष्कर्म किया गया था। इस दुष्कर्म का वीडियो एक मेमोरी कार्ड में सेव था। इस मामले में आरोपी दिलीप कुमार ने वीडियो की मांग की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मेमोरी कार्ड को भी आपराधिक मामलों में सबूत के लिए अहम दस्तावेज करार दिया था।

7. कर्नाटक के अयोग्य विधायकों को इंसाफ

कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर के 17 विधायकों को कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने बागी करार देते हुए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया था। अयोग्य ठहराए गए सभी 17 विधायकों ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर को इन सभी विधायकों को चुनाव लड़ने के लिए योग्यता देने का फैसला सुनाया। बता दें कि इन विधायकों द्वारा अपनी पार्टियां को छोड़ने से प्रदेश में कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर की गठबंधन की सरकार गिर गई थी।

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