comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

Yes Bank crisis: वित्त मंत्री बोलीं- खाताधारकों का पैसा सुरक्षित, चिंता करने की जरूरत नहीं

Yes Bank crisis: वित्त मंत्री बोलीं- खाताधारकों का पैसा सुरक्षित, चिंता करने की जरूरत नहीं

हाईलाइट

  • यस बैंक के मुद्दे पर निर्मला सीतारमण ने कहा सभी के पैसे सुरक्षित
  • वित्त मंत्री ने कहा, जो कदम उठाए गए हैं, वे जमाकर्ताओं को हितों की रक्षा के लिए हैं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यस बैंक संकट को लेकर केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सभी खाताधारकों को भरोसा दिलाया है कि उनका पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है। किसी का भी कोई नुकसान नहीं होगा। वित्तमंत्री ने कहा कि मैं सभी जमाकर्ताओं को भरोसा दिलाना चाहती हूं कि उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है। मैं लगातार आरबीआई के संपर्क में हूं। जो कदम उठाए गए हैं, वे जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए हैं।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, 'आरबीआई गवर्नर ने मुझे आश्वासन दिया है कि मामला जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। भारत सरकार इसको देख रही है, मैंने पिछले 2 महीनों में आरबीआई के साथ मिलकर इसकी निगरानी की है। हमने सबके हित में कदम उठाया है।'

प्रतिबंध: Yes Bank के ग्राहक अब नहीं निकाल सकेंगे 50 हजार से अधिक रुपए, RBI ने लगाई रोक

वहीं यस बैंक के मुद्दे पर आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, '30 दिन जो दिए गए हैं वो आउटर लिमिट है। जल्द ही आरबीआई यस बैंक को संकट से निकालने के लिए तेजी से कार्रवाई करेगा। आरबीआई गवर्नर ने ये भी कहा कि, 'आपको बैंक को समय देना होगा।'

नकदी संकट से जूझ रहे Yes Bank (यस बैंक) के ग्राहक अब 50,000 से अधिक राशि नहीं निकाल सकेंगे। दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने यस बैंक पर रोक लगाते हुए उसके निदेशक मंडल को भंग कर दिया है। साथ ही निकासी की सीमा तय कर दी है। बैंक के लिए एक प्रशासक की भी नियुक्ति की गई है। रिजर्व बैंक ने सरकार के साथ विचार विमर्श के बाद जमाकर्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए यह कदम उठाया है।

बता दें कि निदेशक मंडल पिछले छह माह से बैंक के लिए जरूरी पूंजी जुटाने में विफल रहा। ऐसे में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) प्रशांत कुमार को यस बैंक का प्रशासक नियुक्त किया गया है। RBI ने बैंक के जमाकर्ताओं पर निकासी की सीमा सहित इस बैंक के कारोबार पर कई तरह की पाबंदिया भी लगा दी हैं।

कमेंट करें
InXo9
कमेंट पढ़े
Vikas March 07th, 2020 21:09 IST

अगर vodafone-idea डूबा तो बैंकों की अर्थव्यवस्था और चर्म लाएगी

NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।