छात्र आंदोलन के फेवर में 'सुप्रीम कोर्ट': जेन Z प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत, 18 साल से कम उम्र के प्रोटेस्टर्स पर नहीं चलेगा केस, 8 राज्यों के मुख्य सचिवों से भी होगी बात

जेन Z प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत, 18 साल से कम उम्र के प्रोटेस्टर्स पर नहीं चलेगा केस, 8 राज्यों के मुख्य सचिवों से भी होगी बात
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में हुए छात्रों के प्रदर्शन के मामले में सुनवाई की थी। कोर्ट ने कोई भी गिरफ्तारी न करने का आदेश दिया था।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस के लाठीचार्ज मामले पर चर्चा की। कोर्ट ने साफ किया कि छात्रों का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। छात्रों का प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान 18 साल से कम उम्र के लोगों को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

कोर्ट ने निष्पक्ष जांच पर दिया जोर

कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने कहा कि पहली नजर में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जरूरत दिखती है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस कार्रवाई को लेकर पहले दिए गए दिशा-निर्देशों को अब अपडेट करने का समय आ गया है। 2018 में बने नियम 2026 में कितने कारगर हैं, इसकी भी समीक्षा होनी चाहिए, ताकि प्रदर्शन शुरू होते ही पुलिस के तय प्रोटोकॉल तुरंत लागू हो सकें।

इस दौरान कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, असम, केरल और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इन राज्यों के मुख्य सचिवों को ऑनलाइन पेश होने के लिए कहा गया है।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ने वालों को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि छात्र आंदोलन के दौरान 250 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र जांच से प्रदर्शनकारियों और पुलिस, दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।

सुप्रीम कोर्ट के 4 अंतरिम आदेश

1.18 साल से कम उम्र के जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

2. पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी, जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वालों की जवाबदेही तय होगी।

3. प्रदर्शन से जुड़े CCTV, ड्रोन, बॉडी कैमरा और दूसरे डिजिटल सबूत सुरक्षित रखे जाएं।

4. दिल्ली समेत 8 राज्यों से जवाब मांगा गया, जिन लोगों पर पहले कोई केस नहीं था, उनके खिलाफ फिलहाल कोई सख्त कार्रवाई नहीं होगी।

Created On :   28 July 2026 4:57 PM IST

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