उपचुनाव 2026: दतिया में जातीय समीकरण से निकलेगा जीत का जिंद, त्रिकोणीय मुकाबले में जातिगत वोटरों में सेंध लगाने में जुटे उम्मीदवार

दतिया में जातीय समीकरण से निकलेगा जीत का जिंद, त्रिकोणीय मुकाबले में जातिगत वोटरों में सेंध लगाने में जुटे उम्मीदवार
बीजेपी के सामने ब्राह्मण वोटर्स के साथ क्षत्रिय और वैश्य कोर वोट बैंक को मजबूत रखने की चुनौती ,पर निर्णायक भूमिका में एससी और कुशवाह वोटर्स।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में जातीय समीकरण का हार -जीत में अहम भूमिका रहेगी। बीजेपी-कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी की अपने अपने सामाजिक समुदाय में मजबूत पकड़ बताई जा रही है।

बीजेपी ने ब्राह्मण, कांग्रेस ने क्षत्रिय और एएसपी ने यादव समुदाय के उम्मीदवार को चुनावी मैदान में उतारा है। ऐसे में एससी और कुशवाह वोट निर्णायक भूमिका में है। इस बार बीजेपी के लिए ब्राह्मण-सवर्ण-वैश्य और ओबीसी वोट बैंक को एकजुट रखना अहम होने के साथ कठिन भी है, क्योंकि कांग्रेस से क्षत्रिय और एएसपी से यादव वर्ग के कैंडिडेट चुनावी मैदान में है। पर ये चुनाव है, इसमें कुछ भी कहना थोड़ा आसान नहीं होता है। कांग्रेस कैंडिडेट घनश्याम सिंह का व्यक्तिगत संपर्क और दो बार विधायक रहने का अनुभव बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है। लेकिन सत्ता और संगठन की ताकत के साथ आशुतोष तिवारी की जातीय पृष्ठभूमि कुछ भी कमाल कर सकती है।

ऐसे में तीनों ही दलों के उम्मीदवारों की नजर एससी वर्ग के वोटर्स के साथ साथ कुशवाह और बघेल समाज के मतदाताओं पर है। पिछले कुछ सालों से इन समाज के मतदाता बीजेपी से नाराज चल रहे थे। अब देखना है कि 30 जुलाई को वोटिंग के दिन प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ ,जातीय समीकरण और सत्ता-संगठन में से किसे अधिक तवज्जो मिलता है।

बीएसपी के चुनावी मैदान में ना होने से एससी वोट बंट सकता है। अगर ये किसी एक दल को मिला , तो उस दल के उम्मीदवार को एकतरफा जीत नसीब हो सकती है। इस वोट बैंक में बीजेपी सेंध लगाने की पूरी कोशिश में है। जबकि बीजेपी के सामने ब्राह्मण वोटर्स के साथ अपने क्षत्रिय और वैश्य कोर वोट बैंक को मजबूत रखने की चुनौती है।

Created On :   28 July 2026 8:40 PM IST

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