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बिहार: इंसेफ्लाइटिस बुखार से 100 की मौत, स्वास्थ्य मंत्री का बोलने से इनकार 


हाईलाइट

  • बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या 100 के पार
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने इस मामले में बोलने के किया इनकार
  • बिहार के सीएम नीतीश कुमार के पीड़ितों के पास नहीं पहुंचने पर उठ रहे सवाल
  • बिहार के मंत्री श्याम रजक ने कहा- मरीजों का इलाज जरूरी है या सीएम का आना

डिजिटल डेस्क, मुजफ्फरपुर। बिहार में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी इंसेफ्लाइटिस बुखार का कहर लगातार जारी है। इस बुखार की वजह से अब तक में 100 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। मुजफ्फरपुर से शुरू हुई ये बीमारी अब राज्य के अन्य जिलों को भी अपनी चपेट में ले रहा है। पूर्वी चम्पारण हाजीपुर और मोतिहारी इसकी चपेट में आ गए हैं। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने मौत के बढ़ते आंकड़ों पर सोमवार को कुछ भी बोलने के इनकार कर दिया। बिहार के सीएम नीतीश कुमार के अस्पताल नहीं पहुंचने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

दरअसल 15 साल तक की उम्र के बच्चे इंसेफ्लाइटिस बुखार की चपेट में आ रहे हैं। मरने वालों में ज्यादा बच्चे 1 से 7 साल की उम्र के बीच के हैं। इस बीमारी का मुख्य लक्षण तेज बुखार, उल्टी-दस्त, बेहोशी और शरीर के अंगों में कंपन होना है। बीमारी की वजह से बच्चों की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। 17 जून तक इस बुखार से मरने वालों की संख्या 100 के पार पहुंच गई है। इसकी जानकारी श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के अधिकारी सुनील कुमार साही ने दी। 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पीड़ितों के पास नहीं पहुंचने पर भी सवाल उठ रहे हैं। श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज में इंसेफ्लाइटिस बुखार से 100 की मौत हो चुकी है। क्या सीएम नीतीश कुमार यहां आएंगे? इस सवाल के जवाब में बिहार के मंत्री श्याम रजक ने कहा, सीएम द्वारा हर चीज पर निगाह रखी जा रही है। क्या महत्वपूर्ण है? यहां आने वाले मरीजों की निगरानी और इलाज करना या फिर सीएम का यहां आना? 

हालांकि सीएम नीतीश कुमार स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और चिकित्सकों को हरसंभव कदम उठाने का निर्देश दे चुके हैं। नीतीश कुमार ने इंसेफ्लाइटिस बुखार से मरने वाले बच्चों के परिवार को चार लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है। 

वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सोमवार इंसेफ्लाइटिस बुखार की वजह से बढ़ रहे मौत के आंकड़ो पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। दरअसल हर्षवर्धन सोमवार को शपथ ग्रहण में शामिल होने संसद भवन पहुंचे थे। संसद से बाहर निकलते वक्त मीडिया कर्मियों ने बुखार से हो रही मौतों पर सवाल किया तो उन्होंने कुछ भी कहने से साफ मना कर दिया। 

वहीं मुजफ्फरपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सोने के आरोपों पर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने सफाई दी है। उन्होंने कहा- मैं सो नहीं रहा था, चिंतन-मनन भी करता हूं।

इसी बीच, मुजफ्फरपुर सीजेएम कोर्ट में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता तमन्ना हाशमी को ओर से दायर इस मुकदमे में 24 जून को सुनवाई होगी।

बता दें कि एक दिन पहले ही यानि रविवार को डॉ. हर्षवर्धन मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पहुंचे थे। हर्षवर्धन और स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने यहां मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की थी। इस दौरान बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे भी मौजूद थे। हर्षवर्धन ने स्वास्थ्य और जिला अधिकारियों के एसकेएमसीएच के डॉक्टरों के साथ हाई लेवल मीटिंग भी की थी। सूत्रों के मुताबिक, हर्षवर्धन के चार घंटे के दौरे के दौरान ही तीन बच्चों की मौत हो गई थी। 

दौरे के बाद हर्षवर्धन ने मीडिया से बात करते हुए कहा था, इंसेफ्लाइटिस बुखार से हो रही मौत दुखदायी है। उन्‍होंने एईएस की रोकथाम के लिए हाई क्‍वालिटी रिसर्च सेंटर बनाने की बात कही। उन्‍होंने कहा, इसके लिए बिहार सरकार से बात हो रही है। बिहार सरकार को केंद्र हर संभव मदद करेगी। साल भर के अंदर रिसर्च सेंटर बनकर तैयार हो जाएगा और इस बीमारी पर रिसर्च कर इसे रोका जाएगा, ताकि आगे बच्‍चों की मौत नहीं हो।  

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