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क्रिकेट कोई रॉकेट साइंस नहीं, कड़ी मेहनत, प्रशिक्षण और कोच से ही निखरता है टैलेंट: धोनी

November 22nd, 2018 14:50 IST
क्रिकेट कोई रॉकेट साइंस नहीं, कड़ी मेहनत, प्रशिक्षण और कोच से ही निखरता है टैलेंट: धोनी

हाईलाइट

  • नागपुर में क्रिकेट अकादमी के उद्घाटन को संबोधित करने पहुंचे महेन्द्र सिंह धोनी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। उपराजधानी में एक निवासी क्रिकेट अकादमी के उद्घाटन के दौरान युवाओं को संबोधित करते हुए टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने कहा कि क्रिकेट कोई रॉकेट साइंस नहीं है। एक बढ़िया खिलाड़ी बनने के लिए कड़ी मेहनत, लगन, तकनीकी प्रशिक्षण और सही कोच के मार्गदर्शन की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि आज के समय में कोचिंग सबसे मुश्किल काम है, क्योंकि गलत प्रशिक्षण से युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने का डर रहता है।

कोच के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य
धोनी ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान बच्चों की समस्या को समझना कोच के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। इसके बाद उसके समाधान का पहलू आता है। कुल मिलाकर स्तरीय प्रशिक्षण की मदद से ही प्रतिभा को निखारा जा सकता है। उन्होंने यहां युवाओं से खेल के मैदान में समय बिताने की अपील करते हुए कहा कि खेलकूद से व्यक्तित्व का विकास होता है। माही ने कहा कि खेल के मैदान पर मिली प्रेरणा आपको हार के बाद वापसी करना सिखाती है।  यह आपको विपरीत परिस्थिति में लड़ना सिखाती है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए मदद करती है।

नागपुर से काफी लगाव
नागपुर में मैंने काफी क्रिकेट खेली है और इस शहर के साथ मेरा हमेशा लगाव रहा है। कार्यक्रम के दौरान धोनी के चाहने वालों की बेसब्री ने व्यवस्था के लिए परेशानी भी खड़ी की। माही की सुरक्षा में लगे बाउंसर के धक्का-मुक्की में दो-चार बच्चे गिर भी पड़े, हालांकि किसी को चोट नहीं आई। गायकवाड़-पाटील इंटरनेशनल स्कूल परिसर में स्थापित निवासी क्रिकेट निवासी अकादमी के बच्चों ने कार्यक्रम के दौरान धोनी से सवाल-जवाब किए, जिसका माही ने बेबाकी के साथ जवाब भी दिया। डॉ. मोहन गायकवाड़ ने माही का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।

धोनी के जवाब रोचक रहे, जानिए माही ने हमारे सवालों का क्या जवाब दिया-

Q-2011 विश्वकप के फाइनल में आपने खुद को प्रोमोट क्यों किया?
A- मैं जिस समय बल्लेबाजी करने उतरा, उस समय श्रीलंका के लिए मुरलीधरन गेंदबाजी कर रहे थे। मैंने आईपीएल के दौरान नेट्स पर उनकी गेंदबाजी के खिलाफ कड़ा अभ्यास किया था, इसलिए मुझे भरोसा था कि मैं उन्हें विकेट लेने से रोक दूंगा। इसलिए खुद को प्रोमोट किया।

Q- मैदान पर आप हमेशा ‘कुल’ रहते हैं, ऐसा कैसे कर पाते हैं? क्या कोई विशेष तैयारी रहती है?
A- नहीं, ऐसा कुछ नहीं। मैं मैदान पर शांत रहते हुए अपनी रणनीति को क्रियान्वित करने में विश्वास रखता हूं। इसके लिए मैंने अभी तक कोई विशेष तैयारियां कभी नहीं की। हां, यह सही है कि मैदान में उतरने से पहले मामूली एक्सरसाइज जरूर करता हूं, लेकिन हार्ड एक्सरसाइज कभी नहीं। कभी-कभी हार्ड एक्सरसाइज से बात बिगड़ जाती है।

Q- विकेटकीपर के लिए महत्वपूर्ण क्या?
A- विकेटकीपर की भूमिका मैदान में हमेशा उपकप्तान की होती है। इस स्थान पर खेलने वाले हर खिलाड़ी को हर समय चौकन्ना रहना पड़ता है। एकाग्रता एक विकेटकीपर का सबसे प्रमुख शस्त्र होता है। विकेटकीपर ही एक ऐसा खिलाड़ी होता है, जो विरोधी टीम के बल्लेबाज की तकनीक और उसकी रणनीति को सबसे करीब से देखता है। फील्डर को सही पोजीशन पर खड़ा करने की जिम्मेदारी भी विकेटकीपर की होती है।

Q-  टीम चयन के दौरान किस बातों पर ध्यान रखना जरूरी होता है?
A- किसी सीरीज के पहले टीम का चयन होता है। इसके पहले टीम में शामिल किए जा रहे खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन कप्तान के लिए सबसे मुश्किल काम अंतिम ग्यारह के चयन के दौरान होता है। प्लेइंग इलेवन के चयन के दौरान टीम को संतुलित करना होता है। घरेलू और विदेशी परिस्थिति का अध्ययन भी जरूरी पहलू है।

Q-  2007 टी-20 के फाइनल का आखिरी ओवर जोगिंदर शर्मा को क्याें िदया आपने?
A- उस मैच के आखिरी ओवर में पाकिस्तान के पूर्व कप्तान मिस्बाह उल हक बल्लेबाजी कर रहे थे और मिस्बाह स्पिनरों को आराम से छक्का जड़ने में सक्षम थे। इसलिए मैंने हरभजन सिंह के स्थान पर जोगिंदर शर्मा को गेंद थमाई। उन्हाेंने भी कमाल की गेंदबाजी की और टीम इंडिया को चैंपियनशिप दिला दी।

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