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सेहतमंद बच्चे के लिए गर्भवती महिलाएं रखें इन बातों का ख्याल

सेहतमंद बच्चे के लिए गर्भवती महिलाएं रखें इन बातों का ख्याल

डिजिटल डेस्क। प्रेग्नेंसी के दौरान मां का तनाव लेना होने वाले बच्चे के लिए हानिकारक होता है। प्रग्रेंसी के समय महिला जितनी खुश रहेगी, बच्चा उतना स्वस्थ पैदा होता है, लेकिन बच्चे की सेहत के लिए सिर्फ खुश रहने से  काम नहीं चलता बल्कि आपके रहन-सहन का हेल्दी होना भी जरुरी है। बच्चे की अच्छी हेल्थ के लिए नियमित डाइट लेना बहुत जरुरी होता है। साथ ही स्मोकिंग, अल्कोहल से दूर रहना, नियमित रुप से दवाई लेना, टेस्ट कराना और समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेते रहना बच्चे और मां दोनों को सुरक्षित रखता है। 

दरअसल प्रेग्रेंसी के दौरान मां को डायबिटीज, ओबेसिटी, थाइरॉइड और अन्य बीमारियां होने का रिस्क काफी होता है, जिसका असर बच्चे पर भी पड़ सकता है। यह प्रभाव शॉर्ट-टर्म भी हो सकता है, और लॉन्ग-टर्म भी। इसलिए जरूरी है कि मां अपने लाइफस्टाइल और ईटिंग हैबिट्स पर खास ध्यान दे। ये हैं प्रेग्नेंसी के दौरान, मां को होने वाली कुछ बीमारियां, जिनका असर बच्चे पर भी पड़ सकता है।

जेस्टेशनल डायबिटीज- प्रेग्रेंसी के समय महिलाओं को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस दौरान उन्हें कई बीमारियां हो जाती हैं। जिनका सीधा असर उनके होने वाले बच्चे पर पड़ता है और जेस्टेशनल डायबिटीज उनमें से एक है। इससे बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। यही नहीं इसके कारण बच्चे को ओबेसिटी टाइप 2 डायबिटीज या हृदय संबंधी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ सकता है।

जेस्टेशनल हाइपरटेंशन- जेस्टेशनल हाइपरटेंशन का खतरा प्रेग्रेंसी के 20वें हफ्ते में काफी ज्यादा होता है। इसी दौरान ये बीमारी डिवेलप होती है। इस बीमारी में न्यूट्रीएंट्स और ऑक्सीजन बच्चे को भरपूर मात्रा में नहीं मिल पाते हैं। इससे बच्चे का वजन कम हो सकता है, साथ ही लो ब्लड शुगर के चांस भी रहते हैं। इससे और भी कई खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए जेस्टेशनल हाइपरटेंशन को गंभीरता से लें।

मटर्नल ओबेसिटी- अगर प्रेग्रेंसी के दौरान महिला ओवरवेट है या उसे ओबोसिटी है तो इसका सीधा असर बच्चे की ग्रोथ पर पड़ सकता है,   
न कि सिर्फ बच्चे को डायबिटीज और ओबेसिटी की समस्या हो सकती बल्कि बच्चा समय से पहले यानि प्री मेच्योर भी पैदा हो सकता है।

एनीमिया- प्रेगनेंट महिला को शुरु में ही आयरन की दवाई रोज खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि अधिकतर महिलाओं में खून की कमी पाई जाती है। जिसे एनीमिया कहा जाता है। अगर मां के शरीर में खून की कमी होगी तो इसका असर बच्चे के ऊपर भी पड़ेगा। 
  
 

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