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हाईकोर्ट : माल्या को संपत्ति जब्ति से राहत नहीं, मराठा आरक्षण पर रोक की मांग वाली याचिकाएं खारिज

हाईकोर्ट : माल्या को संपत्ति जब्ति से राहत नहीं, मराठा आरक्षण पर रोक की मांग वाली याचिकाएं खारिज

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने कारोबारी विजय माल्या की संपत्ति जब्त करने को लेकर निचली अदालत में जारी सुनवाई पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। अदालत से माल्या को राहत नहीं मिल सकी है। न्यायमूर्ति अकिल कुरेशी व न्यायमूर्ति एसजे काथावाला की खंडपीठ ने इस संबंध में माल्या की ओर से दायर आवेदन को खारिज कर दिया है। माल्या की संपत्ति को जब्त करने के विषय में मुंबई की विशेष अदालत में सुनवाई चल रही है। माल्या ने अावेदन में इस मामले को लेकर चल रही सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। खंडपीठ ने माल्या के आवेदन पर गौर करने के बाद कहा कि हमारे सामने ऐसी कोई वजह नहीं पेश की गई है जिसके आधार पर याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की जा सके। 5 जनवरी 2019 को मुंबई पीएमएलए कोर्ट ने माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था। इसके बाद माल्या की संपत्ति जब्त करने की कार्यवाही शुरु की गई है। इस बीच माल्या ने हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर की है। जिसमें माल्या ने भगौड़ा आर्थिक अपराधी कानून की वैधता को चुनौती दी गई है। यह याचिका अभी भी सुनवाई के लिए प्रलंबित है। गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय ने माल्या के खिलाफ कार्रवाई शुरु की है। उस पर बैंक के नौ हजार करोड़ रुपए का कर्ज न लौटाने का आरोप है। माल्य फिलहाल लंदन में है। 

मेडिकल में मराठा आरक्षण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिकाएं खारिज

बांबे हाईकोर्ट ने मेडिकल एडमिशन में इस साल मराठा आरक्षण को लागू न किए जाने की मांग को लेकर दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। यह याचिकाएं एमबीबीएस पाठ्यक्रम में एडमिशन के इच्छुक छात्रों के समूह ने दायर की थी। न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति गौतम पटेल की खंडपीठ ने गुरुवार को मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि इस मामले को लेकर हम कारण सहित आदेश बाद में जारी करेंगे। छात्रों की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एमपी वसी ने दावा किया कि सरकार ने सामाजिक व आर्थिक रुप से पिछडा वर्ग (एसईबीसी) को आरक्षण देने के लिए 30 नवंबर 2018 को कानून लाया था। जबकि मेडिकल के एमबीबीएस व डेंटल पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया काफी पहले शुरु हो गई थी। इसलिए इस साल मराठा आरक्षण को लागू न किया जाए। वहीं राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता वीए थोरात ने कहा कि मराठा समुदाय को दिए गए आरक्षण को साल 2019-20 से लागू करना सरकार का नीतिगत निर्णय है। 30 नवंबर 2018 को लाए कानून में मराठा समुदाय के लिए बनाई गई एसईबीसी श्रेणी के छात्रों को 16 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था। लेकिन हाईकोर्ट की अन्य खंडपीठ ने सरकार के आरक्षण से जुड़े कानून की वैधता को तो बरकरार रखा है परंतु आरक्षण के प्रतिशत को घटा दिया है। जिसके तहत शिक्षा में आरक्षण का प्रतिशत 12 और नौकरी में 13 प्रतिशत हो गया है। सरकार ने इस साल मई में मेडिकल के पाठ्यक्रमों में मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए आध्यादेश पहले से लाया था। 

समुद्र-नदी में न छोड़े प्रक्रिया रहित गंदा पानी-कचरा

इसके अलावा बांबे हाईकोर्ट ने कहा है कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) सुनिश्चित करे की मुंबई के समुद्र व नदीं में प्रक्रिया रहित कचरा-पानी न प्रवाहित किया जाए। हाईकोर्ट ने पाया कि मुंबई में रोजाना समुद्र में 2671 एमएलडी कचरा व गंदा प्रवाहित किया जाता है जिसमें से 655 एमएलडी कचरा प्रक्रिया रहित होता है। इस पर मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नांदराजोग व न्यायमूर्ति एन एम जामदार की खंडपीठ ने कहा कि एमपीसीबी आश्वस्त करे कि मुंबई की सभी मल निस्तारण लाइन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से जुड़ी हो। वह इस संबंध में मुंबई महानगरपालिका से रिपोर्ट मंगाए कि कितनी मल निस्तारण की लाइन एसटीपी से जुड़ी हुई है। एमपीसीबी इस मामले में निगरानी रखनेवाली भूमिका निभाए और हर तीन माह में मनपा से रिपोर्ट मंगाए। सिटिजन सर्कल फार वेलफेयर एज्युकेशन नामक संस्था ने समुद्र के कचरे व प्रदूषण को लेकर अधिवक्ता शहजाद नकवी के मार्फत हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। 
 

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