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आयुर्वेदिक-होमियोपैथिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश पात्रता में रियायत से हाईकोर्ट का इंकार

आयुर्वेदिक-होमियोपैथिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश पात्रता में रियायत से हाईकोर्ट का इंकार

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत के तौर पर मेडिकल के आयुर्वेदिक और होमियोपैथिक पाठ्यक्रम में प्रवेश की पात्रता से जुड़े नियमों में ढील देने से इंकार कर दिया है। जबकि याचिका को विचारार्थ मंजूर कर लिया है। एसोसिएशन आफ मैनेजमेंट आफ होमियोपैथी व आयुर्वेदिक मेडिकल कालज आफ महाराष्ट्र ने इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि होमियोपैथी व आयुर्वेदिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश की पात्रता के तौर पर ‘नीट’ परीक्षा के अंको की जो सीमा तय की गई है उसे घटा दिया जाए। क्योंकि इसके चलते कालज की बहुत सी सीटे रिक्त रह जाती है। मेडिकल पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए नीट की परीक्षा ली जाती है। नीट की परीक्षा में 50 पर्सेंटाइल अंक होने की स्थिति में छात्र होमियोपैथी व आयुर्वेद के मेडिकल के पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए पात्र होगा। 

कड़ी पात्रता नियमों के चलते रिक्त रह जाती हैं सीटें

सेंट्रल काउंसिल फॉर होमियोपैथी ने 22 मार्च 2018 को होमियोपैथी पाठ्यक्रम में प्रवेश की पात्रता से जुड़े नियमों में संसोधन किया था। जिसके तहत दाखिले के लिए नीट की मैरिट को प्रधानता देने की बात कही गई थी। सेंट्रल काउंसिल फार होमियोपैथी व आयुष मंत्रालय की ओर से इस विषय को लेकर लिए गए फैसले के खिलाफ एसोसिएशन आफ मैनेजमेंट आफ होमियोपैथी व आयुर्वेदिक मेडिकल कालजे आफ महाराष्ट्र ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि प्रवेश की पात्रता को लेकर नियमों में किया गया संसोधन नियमों के विपरीत है। इसके अलावा नियमों में बदलाव करते समय कालेजों से चर्चा नहीं की गई है। इसलिए इस पर रोक लगाई जाए। नीट की अनिवार्यता को लेकर भी नियमों के तहत निर्णय नहीं लिया गया है। 

सिर्फ परीक्षा में शामिल होने से प्रवेश के लिए नहीं हो सकते पात्र 

न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति गौतम पटेल की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि कानून के तहत प्रवेश की पात्रता से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। शिक्षा के स्तर को कम करने का किसी को अधिकार नहीं खास तौर से मेडिकल शिक्षा का। सिर्फ किसी परीक्षा भर में शामिल होने से कोई मेडिकल एडमिशन के लिए खुद को पात्र नहीं मान सकता। परीक्षा की मैरिट व प्रदर्शन का अपना महत्व है। संविधान ने यदि किसी वर्ग को आरक्षण व दूसरे रुप में कोई रियायत दी है तो वह उन्हें मिलनी चाहिए। पर प्रथम दृष्टया मेडिकल शिक्षा के स्तर को कम करने की बात को नहीं स्वीकार किया जा सकता। खंडपीठ ने कहा कि याचिका में कुछ मुद्दे पर विस्तार से सुनवाई की जरुरत है। इसलिए हम याचिका को विचारार्थ मंजूर करते हैं लेकिन अंतरिम राहत के तौर पर प्रवेश की पात्रता से जुड़े नियमों पर रोक नहीं लगाई जा सकती। अधिवक्ता डीपी सिंह ने अधिवक्ता ए सेठना के साथ इस मामले में केंद्र सरकार का पक्ष रखा। 
 

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