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मुंह का प्री-कैंसर : 10 साल में 40 गुना बढ़े मरीज, विदर्भ महाराष्ट्र में सबसे ऊपर

January 20th, 2019 17:57 IST
मुंह का प्री-कैंसर : 10 साल में 40 गुना बढ़े मरीज, विदर्भ महाराष्ट्र में सबसे ऊपर

डिजिटल डेस्क, नागपुर। मुंह के प्री-कैंसर मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 10 वर्ष पहले ऐसे मरीजों का आंकड़ा 20 से 22 तक सीमित था। वर्ष 2018 में यह आंकड़ा 890 पर पहुंच गया है। शासकीय डेंटल कॉलेज तथा अस्पताल में दंत रोग परीक्षण दौरान यह खुलासा किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुंह के कैंसर से पीड़ितों में सबसे ज्यादा उनकी तादाद है, जो तंबाकू युक्त खर्रे का सेवन करते हैं। तंबाकू, चूना, सुपारी और विविध प्रकार के फ्लेवर को मिलाकर बनाए जाने वाले खर्रे का सेवन सेहत के लिए खतरनाक है। मुंह के प्री-कैंसर मरीजों की संख्या में विदर्भ का स्थान महाराष्ट्र में सबसे ऊपर है।

मुंह न खुलना : सामान्य तौर पर मुंह खुलने पर 4 उंगलियां आसानी से अंदर जाती हैं। ओरल सब्म्युकस फाइब्रोसिस यानी प्री-कैंसर के शिकार होने पर मुंह खुलने का प्रमाण धीरे-धीरे कम हो जाता है। गाल और जबड़े में अकड़न आना शुरू हो जाती है। इससे मरीज के खान-पान पर असर होता है। बीमारी अंदर ही अंदर बढ़ती चली जाने पर आगे चलकर भयंकर परिणाम दिखाई देते हैं। मरीज की प्रतिकार क्षमता धीरे-धीरे कम होकर 2 से 10 वर्ष में यह कैंसर का रूप ले सकता है। 

गाल में सफेद एक दाग : प्री-कैंसर का वह लक्षण है, जिसमें गाल में सफेद दाग पड़ता है। यह दाग बढ़ता हुआ आगे चलकर कैंसर में बदलता है। 

जगह-जगह दाग (पीवीएल और वीएल) : इस प्रकार के प्री-कैंसर में गाल और जबड़े में जगह-जगह सफेद दाग पड़ जाते हैं। यह जल्द ही कैंसर में तब्दील हो जाते हैं। 

बैंगनी रंग के दाग :  इस प्रकार के प्री-कैंसर में सूजन आती है। त्वचा, बाल, नाखून को प्रभावित करता है। त्वचा में बैगनी रंग के दाग पड़ना, उसमे खुजली आना इसके लक्षण है। यह समस्या कुछ सप्ताह चलती है। सफेद चिपचिपे पैच पड़कर दर्द का कारण बनते हैं।

डॉ. सिंधु गणवीर अधिष्ठाता शासकीय डेंटल कॉलेज तथा अस्पताल के मुताबिक तंबाकू या तंबाकूजन्य पदार्थों का सेवन मुंह के कैंसर का प्रमुख कारण है। नागपुर तथा िवदर्भ में इस प्रकार के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। दंत रोग परीक्षण दौरान एक वर्ष में प्री-कैंसर के 890 मरीज मिले हैं। 

मुंह का कैंसर 5 चरणों में परेशान कर सकता है

पहला चरण : कैंसर कहां तक फैला है 
दूसरा चरण : कैंसर छोटा है या नहीं 
तीसरा चरण : बड़ा हो गया, लेकिन फैला नहीं 
चौथा चरण : आसपास के ऊतकों में फैला है या नहीं 
पांचवां चरण : जहां फैला था, वहां से अन्य अंगों तक फैला या नहीं

वर्ष 2018 में पाए गए प्री-कैंसर के मरीज

ओरल सब्म्युकस फाइब्रोसिस             :    663
ओएसएमएफ तथा ल्यूकोप्लाकिया     :     13
पीवीएल और वीएल                          :    172
लिचेन प्लानस                                :     42
कुल                                               :   890

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