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नागपुर हाईकोर्ट : अवैध तरीके से मदद के आरोप पर मुश्किल में निर्वाचन अधिकारी

नागपुर हाईकोर्ट : अवैध तरीके से मदद के आरोप पर मुश्किल में निर्वाचन अधिकारी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने नागपुर निर्वाचन अधिकारी का मोबाइल फोन, कार्यालय का कंप्यूटर, सीसीटीवी फुटेज, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नामांकन से जुड़े सभी दस्तावेज और अन्य जरूरी इलेक्ट्रॉनिक डेटा जब्त करने के आदेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट में एड. सतीश उके ने याचिका दायर कर निर्वाचन अधिकारी पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के चुनावी नामांकन में कई अनियमितताएं बरती। उन्हें अवैध तरीके से मदद पहुंचाई गई। उके की याचिका पर गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किए। उन्होंने सरकार और चुनाव आयोग से पूछा है कि सामग्री जब्ती का यह काम किस तरह किया जाएगा, जब्ती के बाद डेटा और अन्य सामग्री कैसे सुरक्षित रखी जाएगी? सरकार को इस पर सोमवार तक जवाब प्रस्तुत करना है।

यह है आरोप

याचिकाकर्ता के अनुसार नामांकन के दिन 4 अक्टूबर को दोपहर 3 से शाम 5.30 बजे तक निर्वाचन अधिकारी ने देवेंद्र फडणीवस का चुनावी शपथपत्र सार्वजनिक नहीं किया। यहां तक की पुलिस की मदद लेकर आम जनता के लिए अपने दफ्तर का कॉरिडॉर बंद कर लिया। इससे साफ होता है कि निर्वाचन अधिकारी ने फडणवीस को शपथपत्र में त्रुटियां दूर करने में मदद की। इसी कारण शपथपत्र सार्वजनिक नहीं किया गया। शाम 6 बजे के करीब याचिकाकर्ता की शिकायत के बाद निर्वाचन अधिकारी ने कॉरिडोर में एंट्री शुरू कराई और थोड़ी देर के बाद शपथपत्र सार्वजनिक करते हुए नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर लगाया गया। स्क्रुटनी के दिन याचिकाकर्ता ने फडणवीस के आपराधिक प्रकरणों के आधार पर उनकी शिकायत की। नियमानुसार नामांकन के आखिरी दिन दोपहर 3 बजे के बाद कोई नया दस्तावेज स्वीकार नहीं किया जा सकता, लेकिन शिकायतों पर सुनवाई के दौरान निर्वाचन अधिकारी ने अवैध रूप से फडणवीस के पक्ष में कई दस्तावेज स्वीकार किए। दस्तावेज सील करने के वक्त सभी पक्षों की मांग के बावजूद पंचनामा नहीं किया गया। तमाम त्रुटियों के बावजूद अंतत: फडणवीस का नामांकन स्वीकार किया गया।

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