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पवार से मिले राऊत, उद्धव बोले- सरकार बनाने के लिए संपर्क में है एनसीपी-कांग्रेस, शाह आ रहे मुंबई !

पवार से मिले राऊत, उद्धव बोले- सरकार बनाने के लिए संपर्क में है एनसीपी-कांग्रेस, शाह आ रहे मुंबई !

डिजिटल डेस्क, मुंबई। गृहमंत्री अमित शाह शुक्रवार को मुंबई दौरे पर हैं। महाराष्ट्र में सत्ता को लेकर भाजपा-शिवसेना के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है। ऐसे में बीच का फार्मूला निकालने शाह के आने की संभावना है। जानकारी के अनुसार अमित शाह का शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात कर सकते है। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच सरकार बनाने को लेकर चर्चा हो सकती है। इधर मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा और शिवसेना में तनातनी के बीच शिवसेना के सांसद संजय राऊत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार से मुलाकात की। पवार से राऊत की मुलाकात को शिवसेना का भाजपा पर दबाव डालने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। गुरुवार को राऊत ने कहा कि "मैं पवार के पास उन्हें दीपावली पर्व की शुभकामनाएं देने के लिए गया था। इस दौरान हमने प्रदेश की राजनीति को लेकर भी चर्चा की।"विधानसभा चुनाव में भाजपा को कम सीटें मिलने के बाद से ही  शिवसेना मुख्यमंत्री पद के लिए लगातार अपने सहयोगी दल  भाजपा पर दबाव बनाने में लगी है। भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री पद देने से इंकार के बाद शिवसेना सरकार बनाने के लिए भाजपा के बैगर दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रही है। राऊत और पवार की मुलाकात को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। विधानसभा चुनाव में शिवसेना के 56 विधायक निर्वाचित हुए हैं। निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों को मिलाकर शिवसेना के पास 63 विधायकों का समर्थन है। जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 54 और कांग्रेस के 44 विधायक हैं। 288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत का आंकडा 145 हैं। 

बैठक खत्म होते ही दिल्ली रवाना हुए कांग्रेस नेता

दूसरी ओर कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायको की बैठक खत्म होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष थोरात व अन्य नेताओं ने राकांपा प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की।इसके बाद  प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थोरात, दोनों पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण व पृथ्वीराज चव्हाण, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे, विजय वड्डेटीवार  दिल्ली के लिए रवाना हो गए।बताया जा रहा है कि पार्टी नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर शिवसेना को समर्थन देने के बारे में चर्चा करेंगे। इसके अलावा विधायक दल के नेता के बारे में भी निर्णय लिया जाएगा।
 

सरकार बनाने के लिए संपर्क में है एनसीपी-कांग्रेस

इसके पहले शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि सरकार बनाने के लिए भाजपा की तरह राष्ट्रवादी कांग्रेस और कांग्रेस भी हमसे संपर्क में है। इसके बाद उद्धव ने पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों को संबोधित किया। सूत्रों के अनुसार उद्धव ने कहा कि प्रदेश में नई सरकार बनाने को लेकर भाजपा की तरफ से मेरे पास अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं आया है। उद्धव ने पार्टी के विधायकों से कहा कि हम सरकार बनाएंगे लेकिन भाजपा के साथ जो तय हुआ था उससे कम कुछ भी मंजूर नहीं है और हमें उससे ज्यादा और कुछ नहीं चाहिए। उद्धव ने मुख्यमंत्री ने जो बयान दिया उन्हें ऐसा नहीं बोलना चाहिए था। इससे सरकार बनाने की चर्चा बेपटरी हो गई। भागीदारी के 50-50 प्रतिशत भाजपा के फार्मूले को फिर दोहराया। उन्होंने कहा कि हम केवल इतना चाहते हैं कि भाजपा ने जो वादा किया था, उसे निभाए। उद्धव ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के शिवसेना को ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद का वादा नहीं किए जाने वाले बयान को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा की तरफ से मुझे कहा गया कि आप सरकार बनाने के लिए बातचीत के लिए आइए। लेकिन मैंने मना कर दिया है। मैंने भाजपा को सुझाव दिया है कि दोनों दलों के दो-दो नेता बातचीत शुरू करें। लेकिन जब फडणवीस ने कह दिया कि शिवसेना को मुख्यमंत्री पद के लिए कोई आश्वासन ही नहीं दिया गया तो बातचीत शुरू करने का कोई मतलब नहीं है। यदि फडणवीस को पता नहीं है कि लोकसभा चुनाव से पहले मेरे और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बीच हुई बैठक में क्या तय हुआ था तो उन्हें एक बार फिर से पता लगा लेना चाहिए। 

सरकार बनाने को लेकर जल्दबाजी नहीं

उद्धव ने कहा कि मीडिया में शिवसेना को 13 मंत्री पद दिए जाने की जो खबरें आ रही हैं, यह सब शिगूफा है। इसमें कोई सच्चाई नहीं है। उद्धव ने कहा कि मुझे सरकार बनाने के लिए कोई जल्दबाजी नहीं है। हमें राज्य के बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों समेत अन्य मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। यदि आप लोगों को मंत्री बनने की जल्दी है तो बताइए। इस पर विधायकों ने उद्धव से कहा कि आपका फैसला हमें स्वीकार होगा। गुरुवार को दादर स्थित शिवसेना भवन में पार्टी के विधानमंडल दल की बैठक हुई। इसमें शिवसेना के विधानमंडल दल का नेता प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एकनाथ शिंदे को चुना गया। शिवसेना के विधानमंडल दल के नेता पद के लिए पार्टी के विधायक व युवा सेना अध्यक्ष आदित्य ठाकरे ने शिंदे के नाम का प्रस्ताव रखा। इसके बाद शिवसेना के विधायक व राजस्व राज्य मंत्री संजय राठोड, संजय शिरसाठ समेत पांच विधायकों ने शिंदे के नाम का अनुमोदन किया। समझा जा रहा था कि आदित्य ठाकरे विधायक दल के नेता बनाए जाएंगे लेकिन ‘ढाई साल के मुख्यमंत्री पद’ को लेकर भाजपा के रुख को देखते हुए आदित्य की बजाय फिर से शिंदे को ही यह जिम्मेदारी सौपी गई है।  

सुनील प्रभु मुख्य सचेतक 

विधानसभा में शिवसेना के मुख्य सचेतक विधायक सुनील प्रभू होंगे। पार्टी विधायकों की बैठक में सचेतक पद के लिए शिवसेना के विधायक व प्रदेश के ग्रामीण विकास राज्य मंत्री दादाजी भुसे ने सुनील के नाम का प्रस्ताव रखा। 

शिवसेना ने भाजपा को याद दिलाया वादा

शिवसेना का मानना है कि सत्ता के समान वितरण में मुख्यमंत्री पद भी शामिल है। पार्टी का कहना है कि यदि राज्य के मुख्यमंत्री का पद सत्ता पद के अंतर्गत नहीं आता तो राजनीति शास्त्र का पाठ नए सिरे से सिखना पड़ेगा। शिवसेना के मुखपत्र सामना में ‘हमें परवाह नहीं’ शार्षक से छपी संपादकीय में यह बाते कहीं गई हैं। पार्टी ने कहा है कि लोकसभा चुनाव के पहले युती की बुझी हुई बाती चलाते समय जो तय किया गया था उसे अमल में लाया जाए। उस वक्त मुख्यमंत्री ने प्रेस कांफ्रेस में ‘सत्ता के समान वितरण’ शब्द का इस्तेमाल किया था। अब यदि कोई यह कह रहा कि किसी राज्य के मुख्यमंत्री का पद सत्ता पद के तहत नहीं आता तो राजनीति का शास्त्र नए सिरे से पढ़ना होगा। संपादकीय में कहा गया है कि समान वितरण के तहत सबकुछ आ गया। पार्टी ने कहा है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत मिलते ही भाजपा ने गठबंधन तोड़ दिया था और 2019 में सफलता मिलते ही ‘वैद्य’ को मारने का दूसरा चरण शुरु हो गया। लेकिन यहां ‘वैद्य’ नहीं मरेगा क्योंकि उसकी जीभ के नीचे संजीवनी बुटी है और यह बुटी जनता का आशिर्वाद है। पार्टी ने कहा कि हमारा भाजपा से वैचारिक मतभेद नहीं है। हम हिंदुत्व की विचारधारा से जुड़े हैं। पर ‘समान वितरण’ के सवाल पर पेंच जरुर फंस गया है।  
 

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