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महाराष्ट्र के जलाशयों में सिर्फ 23.71 फीसदी पानी, जलापूर्ति के लिए जीपीएस से टैंकरों की निगरानी 

महाराष्ट्र के जलाशयों में सिर्फ 23.71 फीसदी पानी, जलापूर्ति के लिए जीपीएस से टैंकरों की निगरानी 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। प्रदेश के जलाशयों में अब महज 23.71 प्रतिशत जल भंडारण है। पिछले साल इस समय जलाशयों में 34.98 प्रतिशत पानी था। बीते साल की तुलना में जलाशयों में फिलहाल 11.27 प्रतिशत कम पानी है। प्रदेश भर में सबसे बिकट स्थित मराठवाड़ा में है। राज्य भर में बड़े, मध्यम और लघु को मिलाकर कुल 3267 जलाशय हैं। इन जलाशयों में फिलहाल 16343.72 दलघमी पानी उपलब्ध है। जिसमें से उपयुक्त जलसंचय 9697.12 दलघमी है। बुधवार को जलसंसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार औरंगाबाद विभाग के 964 जलाशयों में महज 5.42 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। नागपुर के 384 जलाशयों में 12.38 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। अमरावती विभाग के 446 जलाशयों में 25.76 प्रतिशत पानी है। नाशिक विभाग के 571 जलाशयों में 20.2 प्रतिशत पानी है। जबकि पुणे विभाग के 726 जलाशयों में 32.3 प्रतिशत पानी की उपलब्धता है। कोंकण विभाग के 176 जलाशयों में सबसे अधिक 43.32 प्रतिशत पानी मौजूद है। 

मध्यम जलाशयों में सबसे अधिक पानी 

प्रदेश भर के जलाशयों में सबसे अधिक जलसंचय मध्यम जलाशयों में है। राज्य के 258 मध्यम जलाशयों में 30.95 प्रतिशत पानी है। पिछले साल इन जलाशयों में 34.89 प्रतिशत पानी था। राज्य के बड़े 141 जलाशयों में पिछले साल 36.42 प्रतिशत के मुकाबले फिलहाल 22.91 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। राज्य के 2868 लघु जलाशयों में 21.22 प्रतिशत पानी है जबकि पिछले साल 28.53 प्रतिशत पानी उपलब्ध था। 

जलाशयों में पानी की स्थिति 

मराठवाड़ा के तीन जिलों की प्याज बुझाने वाले प्रमुख जलाशय सूख गए हैं। औरंगाबाद के जायकवाड़ी जलाशय, बीड़ के मांजरा और माजलगांव जलाशय में जल भंडारण शून्य प्रतिशत है। वहीं विदर्भ के भंडारा स्थित गोसीखुर्द जलाशय में भी जलसंचय शून्य प्रतिशत है। बावनथडी जलाशय में 10.39 प्रतिशत, असोलामेंढा जलाशय में 37.76 प्रतिशत पानी है। नागपुर के खिडसी जलाशय में 9.87 प्रतिशत, वडगाव जलाशय में 24.42 प्रतिशत, तोतलाडोह जलाशय में 2.21 प्रतिशत, नांद जलाशय में 2.73 और कामठी खैरी जलाशय में 32.59 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। 

जलापूर्ति के लिए जीपीएस के जरिए टैंकरों पर निगरानी रखे अधिकारी-मुख्य सचिव

उधर प्रदेश में जलापूर्ति के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले टैंकरों की आवागमन पर प्रतिदिन जीपीएस से निगरानी रखने का निर्देश राज्य के मुख्य सचिव यूपीएस मदान ने दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य के बांध और तालाब में उपलब्ध मृत जलसंचय का नियोजन करके पीने के लिए पानी देने को प्राथमिकता दी जाए। मंत्रालय में पीने के पानी के संकट को लेकर समीक्षा बैठक हुई। इसमें जलापूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शामलाल गोयल उपस्थित थे। मुख्य सचिव ने कहा कि गट विकास अधिकारी इस पर नजर रखें कि जिन गांवों में पीने के लिए पानी का टैंकर मंजूर है, वहां पर पानी पहुंचाया जा रहा है अथवा नहीं। गटविकास अधिकारी इस बारे में प्रतिदिन जीपीएस की मदद से जानकारी हासिल करें साथ ही आवश्यक जलापूर्ति की कोशिश की जाएं। मुख्य सचिव ने जलसंकट की परिस्थिति से निपटने के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए। प्रदेश में फिलहाल 4 हजार 329 टैंकरों के जरिए 3 हजार 379 गांवों और 7 हजार 856 बस्तियों में टैंकरों से पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्य सचिव ने कहा कि फिलहाल जिस जगह से टैंकर में पानी भरा जाता है वहां से पानी भरने के लिए कितने समय में पानी उपलब्ध हो सकता है। इसकी समीक्षा अधिकारी तत्काल करें। इसके साथ ही अन्य किसी स्त्रोत से पानी की उपलब्धता उपविभागीय अधिकारी और गटविकास अधिकारी सुनिश्चित करें। मुख्य सचिव ने कहा कि जल किल्लत को देखते हुए अस्थायी पूरक जलापूर्ति योजना व नल योजना परियोजनाओं का विशेष मरम्मत काम समय पर पूरा किया जाएगा। 

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