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US ने फिर किया भारत के ASAT टेस्ट का समर्थन, कहा- अंतरिक्ष से खतरे को देखते हुए जरूरी था


हाईलाइट

  • एक हफ्ते में दूसरी बार, पेंटागन ने भारत के एंटी-सैटेलाइट (ASAT) मिसाइल परीक्षण का समर्थन किया है।
  • पेंटागन ने कहा है कि अंतरिक्ष से खतरे को देखते हुए भारत के लिए मिशन शक्ति जरूरी था।
  • पेंटागन ने इससे पहले ASAT परीक्षण से ISS को खतरे के नासा के दावे को भी खारिज कर दिया था।

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। एक हफ्ते में दूसरी बार, पेंटागन ने भारत के एंटी-सैटेलाइट (ASAT) मिसाइल परीक्षण का समर्थन किया है। पेंटागन ने कहा है कि अंतरिक्ष से खतरे को देखते हुए भारत के लिए मिशन शक्ति जरूरी था। पेंटागन ने इससे पहले ए-सैट परीक्षण से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के खतरे के नेशनल एरोनॉटिकल स्पेस एजेंसी (नासा) के दावे को खारिज कर दिया था। बता दें कि नासा ने दावा किया था कि ए-सैट परीक्षण से जो मलबा पैदा हुआ है उससे ISS और उसमें मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खतरा पैदा हो गया है।

यूएस स्ट्रेटजिक कमांड के कमांडर जनरल जॉन ई हाइटेन ने गुरुवार को पावरफुल सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सदस्यों को बताया कि भारत के ए-सैट परीक्षण के प्रमुख बिंदु यह थे कि भारत ने अंतरिक्ष में मौजूद खतरों से खुद का बचाव करने के लिए परीक्षण किया। उन्होंने कहा, वे अपने देश के लिए अंतरिक्ष से खतरों पर चिंतित है। जनरल हाईटेन अमेरिकी सीनेटर के सवालों का जवाब दे रहे थे कि भारत ने ए-सैट परीक्षण क्यों किया?

अमेरिकी सीनेटरों ने कहा कि नासा प्रमुख जिम ब्रिडेनस्टाइन ने कहा था कि भारत का ये परीक्षण खतरनाक था जिसने ISS को खतरे में डाल दिया। इसका जवाब देते हुए हाइटेन ने कहा कि इस तरह की घटनाएं अतीत में भी हो चुकी है जब चीन ने 2007 में अपने एंटी-सैटेलाइट मिसाइल का परीक्षण किया था। इस दौरान मलबे के 100,000 टुकड़े पैदा हुए थे। 2009 में अंतरिक्ष में अमेरिका और एक पुराने रूसी सैटेलाइट के बीच टक्कर हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप अंतरिक्ष में मलबा पैदा हो गया था।

हाइटेन ने अंतरिक्ष में इस तरह के परीक्षणों के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों के विकास की वकालत की। पेंटागन के कमांडर ने कहा, सबसे पहले अंतरिक्ष में परीक्षणों से पैदा हो रहे मलबे के लिए मानदंड तैयार होना चाहिए, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि अंतरिक्ष में और अधिक मलबा पैदा हो।

बता दें कि नासा के दावों के बाद डीआरडीओ ने भी नई दिल्ली में मिशन शक्ति परियोजना पर मीडिया को संबोधित किया था और ASAT के तकनीकी पहलुओं पर मीडिया को जानकारी दी था। इस दौरान डीआरडीओ ने मिशन शक्ति का प्रजेनटेशन भी दिया था। डीआरडीओ प्रमुख रेड्डी ने कहा था कि पीएम मोदी ने 2016 में मिशन शक्ति को हरी झंडी दी थी और रिकॉर्ड 2 साल में करीब 150 वैज्ञानिकों ने इस प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक पूरा किया। रेड्डी ने कहा था, डिफेंस का सबसे अच्छा तरीका डिटरेंस है। उन्होंने कहा था, भारत ने जमीन से ही सीधे टारगेट को हिट करने की अपनी क्षमता साबित की है।

सतीश रेड्डी ने कहा था कि अंतरिक्ष में मौजूद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जैसे ग्लोबल ऐसेट को मलबे के खतरे बचाने के लिए मिशन शक्ति में लोअर ऑर्बिट को चुना गया। अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने भारत के एंटी-सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण के बाद कहा था कि इस परीक्षण के कारण भारतीय सैटेलाइट के 400 टुकड़े पृथ्वी की नीचली कक्षा में चक्कर लगा रहे हैं। इसके चलते इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) और उसमें रह रहे एस्ट्रोनॉट्स के लिए खतरा पैदा हो गया है।

नासा प्रमुख जिम ब्राइडनस्टाइन ने अपने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा था 'हम भारतीय सैटेलाइट के टुकड़ों को ट्रैक करने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक हमने 10 सेमी या उससे बड़े 60 टुकड़ों को ट्रैक किया है। 24 टुकड़े आईएसएस के पास चक्कर लगा रहे हैं, यह खतरनाक साबित हो सकते हैं। नासा चीफ ने यह भी कहा था कि आईएसएस से टुकड़ों के टकराने का खतरा 44% तक बढ़ चुका है। हालांकि यह खतरा समय के साथ कम हो जाएगा क्योंकि वायुमंडल में प्रवेश के साथ ही मलबा जल जाएगा।

यहां हम आपको ये भी बता दें कि यूनाइटेड नेशन ऑफिस फॉर आउटर स्पेस अफेयर्स (UNOOSA) के अनुसार, वर्तमान में पृथ्वी की कक्षा में ट्रेक की गई 19,000 आर्टिफीशियल ऑब्जेक्ट में से केवल 1400 कार्यात्मक सैटेलाइट हैं। बाकी सभी ऑब्जेक्ट को सामूहिक रूप से 'अंतरिक्ष मलबे' के रूप में जाना जाता है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के एक अनुमान के अनुसार, ऑर्बिट में 34,000 से अधिक टुकड़े हैं जो आकार में 10 सेमी से बड़े हैं। 1 सेमी और 10 सेमी के बीच के करीब 10 लाख टुकड़े और एक सेंटीमीटर से कम आकार के टुकड़ों की संख्या 1 करोड़ 28 लाख के करीब है।

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