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अमेठी में बोले राहुल- जब भी मेरी जरूरत होगी, आपके लिए मौजूद रहूंगा


हाईलाइट

  • आज अमेठी दौरे पर राहुल गांधी
  • लोकसभा चुनाव में हारने के बाद पहला अमेठी दौरा
  • अमेठी में कार्यकर्ताओं से मुलाकात और हार की समीक्षा जारी

डिजिटल डेस्क, अमेठी। लोकसभा चुनाव 2019 में अपने ही गढ़ को गंवाने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी बुधवार (10 जुलाई) को पहली बार अमेठी पहुंचे। राहुल ने इस दौरान निर्मला शैक्षिक संस्थान में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। राहुल गांधी ने कहा, मैं वायनाड से सांसद हूं। मैंने वायनाड में अपना समय दिया है लेकिन मैं आपको भी अपना समय दूंगा। मैं 15 साल तक अमेठी से सांसद था, अमेठी से मेरे पुराने संबंध हैं। जब भी अमेठी को मेरी जरूरत होगी, चाहे सुबह के 4 बज रहे हों मैं आपके लिए मौजूद रहूंगा।

राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा, वे हार से निराश न हों और क्षेत्र में जाकर पार्टी को मजबूत करें। राहुल ने कहा, नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, योगी जी मुख्यमंत्री और भाजपा की यहां सांसद हैं। हमें विपक्ष के काम में सबसे ज्यादा मजा आता है। अब आपको अमेठी में विपक्ष का काम करना है। जो जनता की जरूरतें हैं, उसे पूरा करनी हैं।

ट्विटर पर हुए 1 करोड़ फॉलोअर्स

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर राहुल गांधी के 10 मिलियन फॉलोअर्स हो गए हैं। इसके लिए राहुल गांधी ने शुक्रिया जताया है। साथ ही लिखा कि वो इस खास मौके को अमेठी में सेलिब्रेट करना चाहते हैं।

अमेठी लोकसभा क्षेत्र को अब तक कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, लोकसभा चुनाव 2019 में ये सीट हारने पर पूरी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। अमेठी सीट 1967 में अस्तित्व में आई थी और उस दौरान हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के विद्याधर वाजपेयी संसद पहुंचे थे। इस सीट का संसदीय इतिहास बताता है कि अब तक यहां से ज्यादातर समय कांग्रेस जीतती रही है। बहुत कम मौके आए जब कांग्रेस के हाथ से यह सीट फिसली हो। 

इस बार भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने 55,120 वोटों से हरा दिया था। राहुल अभी केरल के वायनाड से सांसद हैं। हार के बाद उनका यह पहला अमेठी दौरा है। राहुल के राजनीतिक करियर में यह पहला मौका होगा, जब वे अमेठी में वहां के सांसद की हैसियत से नहीं, बल्कि किसी अन्य सीट के सांसद के तौर पर जाएंगे। अमेठी से हारने के बाद भी राहुल गांधी केरल के वायनाड से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचने में कामयाब हुए हैं।

बता दें कि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली हार की जिम्मेदारी लेते हुए राहुल ने कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने कहा था कि पार्टी को मजबूत करने के लिए उन्हें कई कड़े फैसले भी लेने होंगे, उनके इस्तीफे के बाद कई कांग्रेसी पदाधिकारियों ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।  

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