शीतकालीन सत्र: गोगोई ने पीएम मोदी के भाषण के बाद पलटवार करते हुए कहा आप हर बार नेहरू और कांग्रेस पर साधते हैं निशाना

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने वंदे मातरम पर पीएम मोदी के भाषण के बाद पलटवार किया। गोगोई ने कहा प्रधानमंत्री के भाषण से दो बातें समझ में आती है। पहली - ऐसा लगा जैसे उनके राजनीतिक पूर्वज ही अंग्रेजों से लड़ाई लड़ रहे थे, दूसरा वंदे मातरम पर राजनीतिक विवादित करना चाहते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर पर दिए भाषण में नेहरू का नाम 14 बार, कांग्रेस का नाम 50 बार, संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर नेहरू का नाम 10 बार, कांग्रेस का नाम 26 बार, 2022 में राष्ट्रपति अभिभाषण पर नेहरू का नाम 15 बार, 2020 में राष्ट्रपति अभिभाषण पर नेहरू का नाम 20 बार।
गोगोई ने कहा, मुस्लिम लीग ने वंदे मातरम का पूर्ण बहिष्कार करने की मांग की थी। हमारे नेता मौलाना अबुल कलाम आजाद साहब ने कहा था- मुझे वंदे मातरम से कोई आपत्ति नहीं, यही फर्क है हमारे मौलाना आजाद और मुस्लिम लीग में। हिंदू महासभा ने भी उस वक्त वंदे मातरम की आलोचना की थी। कांग्रेस सांसद ने कहा जब पूरे देश ने 'जन-गण-मन' को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया तो आपके राजनीतिक पूर्वजों ने 52 साल तक अपनी शाखाओं में न तिरंगा फहराया और न राष्ट्रगान गाया। ऐसे में आप क्या राष्ट्र की बात करते हैं?
कांग्रेस सांसद गोगोई ने पीएम मोदी के भाषण पर कटाक्ष करते हुए कहा आप हर बार नेहरू और कांग्रेस पर निशाना साधते हैं, लेकिन जितनी कोशिश कर लें, नेहरू पर दाग नहीं लगा पाएंगे। कांग्रेस नेता ने कहा आप 1937 के कांग्रेस अधिवेशन की बात करते हैं, लेकिन मैं पूछना चाहता हूं, 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में आपके राजनीतिक पूर्वज कहां थे? 1905 में स्वदेशी आंदोलन के बाद वंदे मातरम का देश भर में प्रचार हुआ। कई जगहों पर अनुवाद के लिए अलग-अलग भाषाओं में वंदे मातरम की व्याख्या पूरे देश में हुई। 1937 में कांग्रेस ने यह फैसला लिया था, जहां पर भी नेशनल गैदरिंग होगी, वहां पर हम वंदे मातरम' की पंक्तियों को गाएंगे। मुस्लिम लीग और हिंदू महासभा ने इसे राजनीतिक रूप से देखा और कांग्रेस पार्टी की निंदा की।
वायसराय कर्जन ने बंगाल को दो भाग में बांटकर भारत पर गहरी चोट डालने की कोशिश की। 1905 में स्वदेशी आंदोलन हुआ। उसी साल बनारस में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ। वहां सरला देव चौधरी ने वंदे मातरम गीत पेश किया। उन्होंने बहुत अहम संशोधन किया। बंकिम चंद्र ने इसे बंगाल के संदर्भ में लिखा था और आबादी 7 करोड़ लिखा था, सरला देव चौधरी ने उसमें बदलाव करके 30 करोड़ किया और इसे देशभर में तवज्जो दी। राजनीतिक नारा से इसे राष्ट्रीय तवज्जो मिली। कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय गीत की तवज्जो दी।
Created On :   8 Dec 2025 5:47 PM IST












