India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर राहुल ने भाजपा पर बोला हमला, सरकार ने यूएस के सामने घुटने टेक दिए

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर राहुल ने भाजपा पर बोला हमला, सरकार ने यूएस के सामने घुटने टेक दिए

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी सोमवार (23 मार्च) को गुजरात के वडोदरा पहुंचे। इस दौरान वह पार्टी के द्वारा आयोजित ‘आदिवासी अधिकार संविधान सम्मेलन’में शामिल हुए।उन्होंने अपने संबोधन में भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते (Trade Deal)को लेकर PM मोदी पर निशाना साधा है। राहुल ने कहा सरकार ने अमेरिकी के सामने घुटने टेक दिए हैं और राष्ट्रीय हितों की रक्षा नहीं की।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर राहुल ने उठाए सवाल

भारत-यूएस अंतरिम ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस सांसद ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा ऐसा पहली बार हुआ है, जब देश के कृषि क्षेत्र को सरकार द्वारा अमेरिकी उत्पादों के लिए खोला गया है। राहुल ने कहा 'भारत का कीमती डेटा अमेरिका को बेच दिया गया। अमेरिकी कंपनियों का टैक्स माफ किया जाता है, जबकि आप पर टैक्स का बोझ बढ़ाया जाता है। हमने अमेरिका को बहुत कुछ दिया है, लेकिन उनसे कुछ नहीं लिया।'

बीजेपी आपको 'आदिवासी' नहीं 'वनवासी'

उन्होंने कहा, भारतीय जनता पार्टी (BJP) कहती है कि देश में विकास हुआ है, 'मैं आपसे पूछता हूं यहां किसका विकास हुआ। क्या यह विकास उन आदिवासियों का हुआ जो सदियों से इस जल-जंगल-जमीन की रक्षा कर रहे हैं? उन्होंने आगे कहा भाजपा आपको 'आदिवासी' नहीं 'वनवासी' कहती है। इसके पीछे एक गहरी साजिश है। 'आदिवासी' का मतलब है- इस जमीन का पहला मालिक, लेकिन 'वनवासी' कहकर वे आपको सिर्फ जंगल का निवासी बनाना चाहते हैं। जिससे कल को जब जंगल काट दिए जाएं, तो आपके पास कोई हक न बचे और आप मजदूरी करने पर मजबूर हो जाएं।'

आदिवासियों का अगल बजट हो- राहुल

राहुल ने आदिवासियों के लिए अलग बजट की मांग करते हुए कहा, 'हम चाहते हैं आदिवासियों के लिए अलग बजट हो, उनके लिए हाई-क्वालिटी स्कूल और कॉलेज हों। जंगल में रहने वाले हमारे युवाओं को भी अंग्रेजी और आधुनिक शिक्षा की जरूरत है। हमारा सपना है कि कल की CEO की सूची में आदिवासी युवाओं के नाम हों'। लेकिन भाजपा वालों की सोच इसके विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP-RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ) की विचारधारा थोपकर शैक्षणिक संस्थानों को खत्म कर रही है, जिससे पिछड़ों और आदिवासियों को उनका हक न मिल सके।'

Created On :   23 March 2026 9:35 PM IST

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