विधानसभा चुनाव 2026: नवद्वीप सीट पर हिंदुओं का प्रभाव , फिर भी निर्णायक भूमिका में होता है करीब 37 फीसदी मुस्लिम -SC वोटर्स

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की नवद्वीप विधानसभा सीट से बीजेपी ने यहां के प्रतिष्ठित श्री श्री राधा सुदर्शन लाल जीयू मंदिर के पुजारी श्रुति शेखर गोस्वामी को उम्मीदवार घोषित किया है। गोस्वामी का सामना पांचवीं वार के विधायक पुंडरीकाक्ष साहा से है, जो कड़ा मुकाबला बताया जा रहा है। बीजेपी यहां धार्मिक भावनाओं से प्रेरित 9 प्रतिशत वोट बैंक को साधने की फिराक में हैं।
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1951 में गठित नवद्वीप विधानसभा का मतलब नया द्वीप है। यह पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में आती है। नवद्वीप असेंबली में अब तक 17 बार चुनाव हुए है। इस सीट के सियासी सफर में वोटर्स ने किसी एक दल को प्रभावी नहीं होने दिया है। दशकों से चुनावी नतीजों में वोटरों ने मिले-जुले फैसले दिए हैं, जिसमें CPI(M) ने 6 बार, कांग्रेस ने 5 बार और अविभाजित CPI ने 1962 में एक बार जीत हासिल की, लेकिन 2001 से तृणमूल कांग्रेस के पुंडरीकाक्ष साहा ने लगातार पांच बार जीत हासिल कीं। टीएमसी यहां आगे है। नवद्वीप सीट हिंदुओं को प्रभाव है, लेकिन करीब 20 फीसदी मुस्लिम वोटर्स और करीब 17 फीसदी अनुसूचित जाति मतदाता भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते है।
तृणमूल कांग्रेस ने नवद्वीप में लेफ्ट फ्रंट-कांग्रेस गठबंधन को हाशिए पर धकेल दिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी के सामने बीजेपी एक गंभीर चुनौती बनकर उभर रही है। क्योंकि पिछले दो तीन चुनाव में टीएमसी की चुनावी जीत की बढ़त कम हुई है। यहां मुस्लिम मतदाताओं का विभाजन टीएमसी के जीत समीकरण को बदल सकता है, जो बीजेपी के लिए लाभदायक साबित हो सकता है। यानि इस चुनाव में इस गढ़ में बीजेपी और टीएमसी के बीच यहां कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है।
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चुनाव आयोग ने 15 मार्च को पश्चिम बंगाल विधानससभा चुनाव 2026 के चुनावी कार्यक्रम की घोषणा की, यहां 2 फेज में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी, पहले फेज में 152 सीटों और दूसरे फेज में 142 सीटों पर वोटिंग होगी जबकि मतगणना 4 मई 2026 को होगी।
मौजूदा सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, वहीं बीजेपी , वाम दल और कांग्रेस नए गठबंधनों और रणनीतियों के साथ चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 294 में से 213 सीटें जीतकर शानदार जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी 77 पर सिमट गई थी। अबकी बार भी मुख्य मुकाबला बीजेपी और टीएमसी के बीच माना जा रहा है।
पश्चिम बंगाल की सरकार का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। नई सरकार चुनने के लिए समय पर विधानसभा चुनाव हो रहे है। इस चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ साथ शिक्षा, विकास, बेरोजगारी, महंगाई और प्रदेश -केंद्र सरकार संबंध काफी अहम है।
आपको बता दें बीजेपी ने इस बार यूपी के योगी की तर्ज पर बंगाल में कुछ सीटों पर धार्मिक पुजारियों को टिकट दिया है। बीजेपी के धार्मिक प्रत्याशी लंबे समय से धार्मिक नेतृत्व के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक मामलों में भक्तों और भक्ती से जुड़ी रही हैं। अब देखना है कि इस बंगाल चुनाव में बीजेपी की मठ मंदिर चेहरे की पॉलिटिक्स कितनी कामयाब होती है।
Created On :   23 March 2026 2:19 PM IST













