विधानसभा चुनाव 2026: TMC के अभेद किले बेहाला पूर्व में लेफ्ट -कांग्रेस गठबंधन वोट बंटवारे से BJP को हो सकता है फायदा

TMC के अभेद किले बेहाला पूर्व में लेफ्ट -कांग्रेस गठबंधन वोट बंटवारे से BJP को हो सकता है फायदा
मौजूदा परिसीमन 2011 के बाद लागू हुआ। 1967 से 2006 के बीच, बेहाला पूर्व में हुए 11 चुनाव में से 9 में CPI(M) ने जीते, 1972 में कांग्रेस ने यह सिलसिला तोड़ा। TMC ने 2001 में अपनी पहली पहचान बनाई। तब से यह टीएमसी का गढ़ है,पिछले तीन चुनाव में टीएमसी की जीत हुई

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की बेहाला पूर्व विधानसभा सीट से बीजेपी ने शिव सोंग सेवा संघ के सन्यासी सुनील महाराज को चुनावी मैदान में उतारा है। बीजेपी प्रत्याशी के सामने TMC के सुभाशीष चक्रवर्ती है, दोनों के बीच कड़ा मुकाबला होना है। सुनील को रत्ना चटर्जी की जगह टिकट दिया है। बीजेपी यहां सेवा और धार्मिक भावना से मतदाताओं के साधने के मूड़ में है। आपको बता दें बीजेपी ने इस बार यूपी के योगी की तर्ज पर बंगाल में कुछ सीटों पर धार्मिक पुजारियों को टिकट दिया है। बीजेपी के धार्मिक प्रत्याशी लंबे समय से धार्मिक नेतृत्व के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक मामलों में भक्तों और भक्ती से जुड़ी रही हैं। अब देखना है कि इस बंगाल चुनाव में बीजेपी की मठ मंदिर चेहरे की पॉलिटिक्स कितनी कामयाब होती है।

1951 में गठित बेहाला पूर्व विधानसभा सीट सामान्य सीट है, जो कोलकाता के दक्षिणी हिस्से में मौजूद है। यह सीट बंगाल की राजधानी शहर का हिस्सा है, लेकिन प्रशासनिक तौर पर यह साउथ 24 परगना जिले के अंदर आती है। सीट के नाम और सीमा में कई बार बदलाव हुए।

शुरुआती चुनावों में इंडियन लेफ्ट का दबदबा रहा, 1952 में पहला चुनाव ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने जीता, उसके बाद 1957 और 1962 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने जीता . ​​1967 में सीट बेहाला पूर्व और बेहाला पश्चिम में विभाजित हुई। जो 2006 तक बना रहा। बेहाला पूर्व और बेहाला पश्चिम का मौजूदा परिसीमन 2011 के बाद लागू हुआ। जबकि 1967 से 2006 के बीच, बेहाला पूर्व में हुए 11 चुनाव में से 9 में CPI(M) ने जीते, 1972 में कांग्रेस ने यह सिलसिला तोड़ा।

TMC ने 2001 में अपनी पहली पहचान बनाई। तब से यह टीएमसी का गढ़ रहा है। पिछले तीन चुनाव में टीएमसी की जीत हुई। लेकिन इस सीट पर बीजेपी का लगातार बढ़ता वोट परसेंट टीएमसी के लिए मुख्य चैलेंजर के तौर पर उभर रहा है। जिसने सत्तारूढ़ टीएमसी के को चिंता में डाल दिया है। लेफ्ट -कांग्रेस गठबंधन वोट बंटवारे से टीएमसी को नुकसान हो सकता है।

पश्चिम बंगाल की सरकार का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। नई सरकार चुनने के लिए समय पर विधानसभा चुनाव हो रहे है। इस चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ साथ शिक्षा, विकास, बेरोजगारी, महंगाई और प्रदेश -केंद्र सरकार संबंध काफी अहम है। मौजूदा सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, वहीं बीजेपी , वाम दल और कांग्रेस नए गठबंधनों और रणनीतियों के साथ चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 294 में से 213 सीटें जीतकर शानदार जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी 77 पर सिमट गई थी। अबकी बार भी मुख्य मुकाबला बीजेपी और टीएमसी के बीच माना जा रहा है। चुनाव आयोग ने 15 मार्च को पश्चिम बंगाल विधानससभा चुनाव 2026 के चुनावी कार्यक्रम की घोषणा की, यहां 2 फेज में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी, पहले फेज में 152 सीटों और दूसरे फेज में 142 सीटों पर वोटिंग होगी जबकि मतगणना 4 मई 2026 को होगी।

Created On :   23 March 2026 3:33 PM IST

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