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दल-बदल: कांग्रेस छोड़कर शिवसेना में शामिल हुई एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर, लड़ चुकीं लोकसभा चुनाव

दल-बदल: कांग्रेस छोड़कर शिवसेना में शामिल हुई एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर, लड़ चुकीं लोकसभा चुनाव

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर कांग्रेस छोड़कर आज शिवसेना में शामिल हो गई हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की मौजदूगी में सदस्यता ग्रहण की। उर्मिला पहले मुंबई नॉर्थ सीट से कांग्रेस की उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा चुनाव लड़ चुकीं हैं। जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने हाल में कांग्रेस पार्टी छोड़ दी थी। 

बता दें कि महाराष्ट्र सरकार उर्मिला मातोंडकर को विधान परिषद सदस्य बनाने की तैयारी में थी। उद्धव सरकार ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के पास 12 नामों की एक सूची भेजी थी, जिन्हें राज्यपाल के कोटे से विधान परिषद भेजा जाना है। इन नामों में  उर्मिला का नाम भी शामिल था। 

शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस का महा विकास अघाड़ी गठबंधन है। तीनों ही पार्टियों के चार-चार नेताओं का नाम राज्यपाल के पास भेजा गया था। एनसीपी ने एकनाथ खडसे, राजू शेट्टी, यशपाल भिंगे और आनंद शिंदे का नाम भेजा है, जबकि कांग्रेस ने रजनी पाटिल, सचिन सावंत, मुझफ्फर हुसैन और अनिरुद्ध वनकर का नाम भेजा है। वहीं शिवसेना ने उर्मिला मातोंडकर, चंद्रकांत रघुवंशी, विजय करंजकर और नितीन बानगुडे पाटिल का नाम भेजा है। 

दूसरी राजनीतिक पारी की शुरुआत

मातोंडकर ने अपनी दूसरी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी है। मंगलवार को उर्मिला ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में शिवसेना में प्रवेश किया। मातोश्री में मुख्यमंत्री की पत्नी रश्मी ठाकरे ने उर्मिला को शिवबंधन बांधा। इसके बाद उर्मिला ने शिवसेना प्रमुख दिवंगत बालासाहब ठाकरे की तस्वीर के सामने नतमस्तक हुई। उन्होंने कहा कि आज बालासाहब को होना चाहिए था। पार्टी में प्रवेश के बाद पत्रकारों से बातचीत में उर्मिला ने कहा कि शिवसेना हिंदुत्ववादी पार्टी है। मैं जन्म से हिंदू हूं और कर्म से भी हिंदू हूं। शिवसेना की छवि कुछ भी हो पर अंत में बेहतरी उसी में होती है जिसमें लोगों का भला हो। सत्ता में आने के बाद शिवसेना लोगों के उम्मीदों पर खरी उतरी है। उर्मिला ने कहा कि सेक्युलर होने का मतलब यह नहीं होता है कि अपने या दूसरे के धर्म से नफरत करना और हिंदुत्व का अर्थ यह नहीं होता है कि अपने धर्म को ही आगे ले जाना। हिंदू धर्म सहिष्णु और सर्वसमावेशी है। उर्मिला ने कहा कि देश की राजनीति में जहरीला वातावरण बन गया है।

सीएम ने कहा, विधान परिषद में आप जैसे लोगों की जरूरत

उर्मिला ने कहा कि मुझे राज्यपाल कोटे की सीट पर विधान परिषद में भेजने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने फोन किया था। उन्होंने मुझ से कहा कि विधान परिषद की बहुत बड़ी परंपरा है। राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा और सदन की गरिमा बढ़ाने के लिए आप जैसे लोगों की जरूरत है। इसलिए मैंने उनके प्रस्ताव को स्वीकार किया। उर्मिला ने कहा कि मेरे लिए पद  कोई मुद्दा नहीं था लेकिन मैंने दूसरी वजहों से कांग्रेस की तरफ से विधान परिषद में भेजे जाने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। 

कांग्रेस से नारागजी नहीं

लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस छोड़ने के सवाल पर उर्मिला ने कहा कि कांग्रेस में मुझसे दुर्व्यवहार नहीं हुआ था। लेकिन लोकसभा चुनाव के प्रचार में जो चीजें होनी चाहिए थी वह नहीं हो पाई लेकिन मैंने पार्टी की कभी भी आलोचना नहीं की। कांग्रेस को लेकर मेरे मन में कोई गिला शिकवा नहीं है। आज भी मेरे मन में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी सांसद राहुल गांधी को लेकर सम्मान है। कांग्रेस छोड़ते वक्त मैंने यह नहीं कहा था कि राजनीति छोड़ दी है। मैंने कहा था कि मैं लोगों के लिए काम करती रहूंगी। उर्मिला ने कहा कि मैंने अभिनेत्री कंगना रनौत के बारे में पहले काफी कुछ बोल दिया है। मुझे लगता है कि उन पर अब बोलने की जरूरत नहीं है। उन्हें बिना वजह ज्यादा महत्व दिया गया है।  

उर्मिला ने कहा कि मुंबई में देश और पूरे विश्वभर से लड़कियां आती हैं। मुझे महिला सुरक्षा और महिलाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर काम करना है। मेरी जमीन पर उतकर काम करने की इच्छा है। गौरतलब है कि उर्मिला ने कांग्रेस के टिकट पर साल 2019 में उत्तर मुंबई सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें भाजपा के गोपाल शेट्टी के सामने पराजित होना पड़ा था। 
 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।