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बिहार : तेजस्वी के सामने राजद को एकजुट रखने की चुनौती

June 24th, 2020 13:00 IST
 बिहार : तेजस्वी के सामने राजद को एकजुट रखने की चुनौती

हाईलाइट

  • बिहार : तेजस्वी के सामने राजद को एकजुट रखने की चुनौती

पटना, 24 जून (आईएएनएस)। इस साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा और अगले महीने होने वाले विधान परिषद चुनाव के नौ सीटों पर होने वाले चुनाव के पहले राज्य की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को मंगलवार को लगे देाहरे झटके से उबर पाना आसान नहीं है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर नाराजगी दर्ज कराते हुए अल्टीमेटम दे दिया है, वहीं राजद के 5 विधान पार्षदों के पार्टी से इस्तीफा देकर जदयू दाम थाम लिया। अब विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के लिए अपना पद बचना मुश्किल है। ऐसे में राजद के अध्यक्ष लालू प्रसाद की अनुपस्थिति में पार्टी के कर्ताधर्ता तेजस्वी प्रसाद यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को एकजुट रहने की है।

इस बीच हालांकि तेजस्वी ने इसके संकेत दिए है। तेजस्वी ने रघुवंश प्रसाद सिंह को अपना अभिभावक बताते हुए उनसे मिलने की बात कही है। लेकिन जानकार कहते हैं कि अगर तेजस्वी को यह करना ही था, तो फिर अब तक यह क्यों नहीं किए थे।

राजद छोड़कर जद (यू) के दामन थाम चुके विधान पार्षद दिलीप राय ने कहा कि तेजस्वी यादव पार्टी मनमाने तरीके से चला रहे हैं और पार्टी नेताओं की कोई राय नहीली जाती है। उन्होंने दावा किया है कि आने वाले समय में आधे से ज्यादा विधायक पार्टी छोड़ देंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि राजद में कई असंतुष्ट विधायक भी हैं, जो पार्टी बदलने के मूड में हैं। इन्हें पार्टी में रोककर रखना तेजस्वी के लिए चुनौती है।

बिहार के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक समीक्षक मणिकांत ठाकुर भी आईएएनएस से कहते हैं, जाहिर है कि तेजस्वी के सामने अपनों को एकजुट रखना बड़ी चुनौती है। जब खुद में ही बिखराव होगा तो दूसरों के दबाव को कैसे झेला जा सकता है। अपनों को समेटना तेजस्वी के लिए आवश्यक है, नहीं तो नुकसान होगा।

बीबीसी के पत्रकार रहे ठाकुर कहते हैं कि, पार्टी में जगदानंद सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर मान सम्मान दिया गया, लेकिन रघुवंश प्रसाद सिंह की कीमत को किसी भी अन्य नेता को पार्टी में लाना समझ से परे हैं। वरिष्ठ नेताओं को मान, सम्मान नहीं दिया गया तो यह तेजस्वी का लड़कपन साबित होगा।

इधर, राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी कहते हैं कि रघुवंश बाबू पार्टी को सींचने का काम किया है और पार्टी को यहां तक पहुंचाया है। उनपर किसी प्रकार की शंका नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि अभी उनकी तबीयत खराब है, उनकी तबीयत ठीक होते, सबकुछ ठीक हो जाएगा।

तिवारी हालांकि विरोधियों पर भी निशाना साधने से नहीं चूके। उन्होंने बिना किसी के नाम लिए कहा कि जो लेाग जनादेश की चोरी कर सकते है वे खरीद फरोख्त करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि तेजस्वी पार्टी को ठीक से आगे बढ़ा रहे हैं।

इस बीच, जदयू के नेताओं का दावा है कि राजद में नेतृत्व को लेकर नाराजगी है और जल्द ही राजद के कई विधायक भी पार्टी को छोड़ेंगें।

इधर, राजनीतिक गलियारे में चल रही चर्चा को सही मानें तो बिहार में विपक्षी दलों में अभी और टूट होना तय है। बनते-बिगड़ते गठबंधन के बीच नेता और विधायक पाला बदलने को तैयार हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।