दैनिक भास्कर हिंदी: सीएम शिवराज ने 5 संतों को दिया राज्यमंत्री का दर्जा, रद्द की 'नर्मदा घोटाला रथ यात्रा'

April 4th, 2018

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया है। साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शिवराज सरकार ने हिंदू धार्मिक और आध्यात्मिक चेहरों को मंत्री का दर्जा देकर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। सीएम शिवराज के इस कदम को एक तीर से दो निशाना साधने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

जिन पांच बाबाओं को सीएम शिवराज ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया है उनमें से दो बाबा इससे पहले तक बीजेपी सरकार पर ही नर्मदा घोटाला का आरोप लगाकर यात्रा निकालने की तैयारी में थे। ऐसी स्थिति में शिवराज सरकार का ये फैसला बेहद चौंकाने वाला है। वहीं ये भी चर्चा चल रही है कि दिग्विजय सिंह अपनी नर्मदा यात्रा समाप्त करने के करीब पहुंच चुके हैं। इसका राजनीतिक लाभ उठाने से पहले सीएम शिवराज ने नियोजित चाल चली है।

दर्जा देने से पहले गठित की गई थी विशेष समिति
राज्य मंत्री का दर्जा देने से पहले प्रदेश सरकार ने इन पांच बाबाओं के नेतृत्व में नर्मदा से सटे क्षेत्रों में पौधरोपण, जल संरक्षण और साफ-सफाई जैसे विषयों पर जनजागरूकता अभियान चलाने के लिए एक विशेष समिति गठित की थी। इस समिति के ही पांच विशेष सदस्यों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है।

भय्यू महाराज सहित पांच बाबाओं के नाम
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव केके कतिया ने बुधवार को बताया कि प्रदेश की शिवराज सरकार ने पांच विशेष साधु-संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया है। इनमें नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, कम्प्यूटर बाबा, भय्यू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत शामिल हैं।

कांग्रेस का तंज- संतो को लुभाने का प्रयास कर रहे सीएम
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने सीएम शिवराज पर तंज कसते हुए कहा ऐसा कर मुख्यमंत्री अपने पापों को धोने की कोशिश कर रहे हैं। चुनावी साल में साधु-संतों को लुभाने के लिए सरकार का प्रयास है।

इन्ही संतों ने सीएम की नर्मदा यात्रा को बताया था महाघोटाला
गौरतलब है कि राज्यमंत्री का दर्जा पाने वाले इन्हीं बाबाओं के नेतृत्व में 28 मार्च को इंदौर में हुई संत समाज की बैठक में फैसला लिया गया था कि प्रदेश के 45 जिलों में उन 6.5 करोड़ पौधों की गिनती कराई जाएगी जिन्हें पिछले साल 2 जुलाई को शिवराज सरकार ने नर्मदा किनारे रोपित करने का दावा किया था। उन्होंने सरकार के इस दावे को महाघोटाला तक करार दिया था और नर्मदा घोटाला रथ यात्रा निकालने की घोषणा भी की थी।

नर्मदा घोटाला रथ यात्रा निकालने का किया था ऐलान  
बाबाओं ने बैठक में तय किया था कि 1 अप्रैल से 15 मई तक नर्मदा घोटाला रथ यात्रा निकाली जाएगी। इसका नेतृत्व कम्प्यूटर बाबा करने वाले थे। संतो मे राजधानी भोपाल सचिवालय में धरना देने का भी ऐलान किया था। हालांकि इस चेतावनी के बाद सीएम शिवराज ने अपने आवास संतो के साथ बैठक भी की थी।

राज्य मंत्री का दर्जा मिलने के बाद बदले संतों के रंग
राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद संतों के सुर बदल गए हैं। कुछ संतों ने तो नर्मदा घोटाला रथ यात्रा रद्द कर दी है। कम्प्यूटर बाबा ने यात्रा निरस्त करने की जानकारी देते हुए कहा प्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए साधु-संतों की समिति बनाने की हमारी मांग पूरी कर दी है। इसलिए अब हम यात्रा नहीं निकालेंगे।

जानिए भय्यू महाराज के बारे में 
भय्यूजी महाराज का असली नाम उदय सिंह देखमुख है। शुजालपुर के एक किसान परिवार में उनका जन्म हुआ था। भय्यू महाराज का मुख्य आश्रम इंदौर में है। उनकी देखरेख में ही सदगुरु दत्त धार्मिक ट्रस्ट संचालित होता है। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पीएम मोदी सहित कई बड़ी हस्तियां उनके आश्रम आ चुकी हैं।

मप्र से पहले हरियाणा सरकार ने किया था ऐलान  
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी राज्य की सरकार ने संत को मंत्री का दर्जा देने का फैसला लिया है। इससे पहले 2015 में हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने योगगुरु बाबा रामदेव को राज्यमंत्री बनाने का ऐलान किया था। हालांकि बाबा रामदेव ने इस पेशकश को स्वीकार नहीं किया था। रामदेव ने कहा था कि वो बाबा ही रहना चाहते हैं।